राम मंदिर चंदा चोरी में किसी को क्लीन चिट नहीं, कई कर्मचारियों पर केस दर्ज करने की सिफारिश… SIT ने सौंपी रिपोर्ट

अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में SIT ने शुरुआती जांच रिपोर्ट गृह सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी है. विजय विश्वास पंत, आयुक्त लखनऊ मंडल ने दोनों सदस्यों के साथ अयोध्या प्रकरण की कथित दान चोरी की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी. जांच की कार्यवाही अभी जारी है. अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने इस रिपोर्ट को गोपनीय बताया. गृह सचिव को रिपोर्ट सौंपने के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘ये शासन की बनाई गई तीन सदस्यीय SIT कमिटी की रिपोर्ट है, जो अपर गृह सचिव को सौंपी गई.’ उन्होंने आगे कहा, ‘ये एक प्रारंभिक प्रतिवेदन है और इसे हमने सौंप दिया है. ये गोपनीय जांच है और इस समय पर इस बारे में हम ज्यादा नहीं बता सकते. हमारी जो भी जांच थी, हमने उपलब्ध करा दी है.’

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को SIT बनाई थी. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में दान राशि की गणना और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. SIT ने दान की गिनती की प्रक्रिया में संभावित खामियों और गड़बड़ियों का जिक्र किया है.

SIT की रिपोर्ट में अभी तक किसी भी व्यक्ति को क्लीन चिट नहीं दी गई है. रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. जांच के दौरान गणना कर्मियों के चयन की प्रक्रिया की भी पड़ताल की गई है. एसआईटी ने गणना कर्मियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच कनेक्शन की भी जांच की है.

सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश भी की गई है. मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और संचालन के लिए जिम्मेदार कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. रिपोर्ट में प्रशासनिक और निगरानी तंत्र की जवाबदेही से जुड़े कई बिंदुओं का जिक्र किया गया है. SIT ने मामले की विस्तृत और व्यापक जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा है और जांच को आगे बढ़ाने के लिए सहयोगी अधिकारियों और अतिरिक्त संसाधनों की भी मांग की गई है. विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

राम मंदिर मामले में एसआईटी के प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ACS को सौंपे जाने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता दीपक रंजन ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही इस जांच के नतीजों का अंदेशा था और रिपोर्ट से कोई हैरानी नहीं हुई है.

दीपक रंजन ने आरोप लगाया कि जांच में सिर्फ छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई की जाएगी, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों तक जांच की पहुंच नहीं होगी. उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट पर उन्हें भरोसा नहीं है और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

सपा नेता ने ये भी कहा कि जिस जांच एजेंसी पर पहले से ही विवाद और सवाल उठते रहे हों, उसकी रिपोर्ट को पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा सकता. उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके.