Rapido चलाने वाले ने किराए पर दिया बैंक खाता, उसी से हुई 25 करोड़ की साइबर ठगी

साइबर ठगी का एक अनोखा केस सामने आया है, जहां से बहुत से लोगों के लिए सीख भी है. दरअसल, बिहार के पटना में तीन शख्स को गिरफ्तार किया गया है, जिनपर आरोप है कि वे करोड़ों की साइबर ठगी में शामिल थे. पुलिस ने बताया है कि इन आरोपियों के बैंक खातों की मदद से बहुत से साइबर ठगी के मामलों से जुड़ी रकम को एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करते थे. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रभाकर, अमित और दीपक के रूप में हुई है.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी को अपने बैंक खातों से होने वाले हर ट्रांजैक्शन के लिए 3,000 से 5,000 रुपये दिए जाते थे. जांच में खुलासा हुआ है कि इन खातों के जरिए करीब 25 करोड़ रुपये की ट्रांजैक्सन हुई हैं.

तीन आरोपियों में से दो आरोपी Rapido के बाइक टैक्सी चालक हैं. तीसरा आरोपी भी साइबर ठगी नेटवर्क को बैंक अकाउंट किराए पर देने के काम में शामिल था.

पुलिस ने बताया है कि एक इंटरनेशनल साइबर क्राइम सिंडिकेट ऑनलाइन ठगी से आने वाली रकम को रिसीव करने और ट्रांसफर करने के लिए इन बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे.

पटना साइबर पुलिस स्टेशन की प्रभारी DSP संगीता कुमारी ने बताया है कि कई राज्यों के पीड़ितों ने इन तीनों आरोपियों के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर कंप्लेंट दर्ज कराई हैं.

अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद बड़े गिरोह का पता लगाने के लिए जांच कर रही है. पुलिस जानना चाहती है कि वे कौन लोग हैं, जो इन अकाउंट को किराए पर लेकर अपनी मर्जी पर बैंक खाते चलाते हैं.

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि संदिग्ध सिंडिकेट को कितने अन्य लोगों ने अपने बैंक खाते किराये पर दिए थे. साथ ही साइबर ठगी में उनकी क्या भूमिका है.

साइबर ठग, असल में ठगी गई रकम को ट्रांसफर करने और रिसीव करने के लिए आम लोगों के बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं. वे इन बैंक खातों को किराए पर लेते हैं, जिनको ही म्यूल अकाउंट कहा जाता है. कभी भी अपने बैंक अकाउंट का ऑपरेशन किसी अनजान के हाथों में ना दें.