दतिया में BJP में बगावत, नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, आशुतोष तिवारी को मिला, कार्यकर्ताओं का गुस्सा..

मध्य प्रदेश के दतिया जिले में भाजपा के टिकट फैसले को लेकर बवाल मचा हुआ है. भाजपा ने दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी (पूर्व संभागीय संगठन मंत्री और RSS बैकग्राउंड) को टिकट दिया. पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थक नाराज हैं क्योंकि पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए उन्हें टिकट नहीं दिया. इसके बजाय आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया. इससे गुस्साए नरोत्तम मिश्रा के समर्थक, हजारों कार्यकर्ता NH-44 पर उतरे, चक्काजाम किया और BJP नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाए. समर्थकों ने NH-44 पर चक्का जाम कर दिया, बाजार बंद कराए. जाम की वजह से यातायात प्रभावित हुआ.जाम करीब 15 किमी तक फैला है. भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण समेत कई पदाधिकारियों और पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया. दतिया जिले में इस समय आए हुए राजनीतिक तूफान की वजह उपचुनाव के लिए नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाने का फैसला मिश्रा के समर्थकों को रास नहीं आना है. पुराने नेता को टिकट न मिलने से उनके लोग बहुत गुस्से में हैं और पार्टी से नाराजगी जता रहे हैं. नेशनल हाईवे 44 को जाम करने की वजह से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. यातायात ठप हो गया और आम लोगों को परेशानी हुई. प्रदर्शनकारियों ने “BJP मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए. पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है.

नरोत्तम मिश्रा दतिया में मजबूत नेता माने जाते हैं. 2023 के चुनाव में वे कांग्रेस के भारती से हारे थे, लेकिन अब वापसी की तैयारी में थे. उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था. टिकट कटने से उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है.

आशुतोष तिवारी RSS से जुड़े हैं और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं. टिकट मिलने के बाद उन्होंने मिश्रा का आशीर्वाद मांगा, लेकिन जमीनी स्तर पर समर्थक मानने को तैयार नहीं. यह फैसला पार्टी की आंतरिक रणनीति का हिस्सा लगता है.

प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहे. ग्वालियर-झांसी हाईवे पर भी असर पड़ा. महिला कार्यकर्ताओं ने भी विरोध में हिस्सा लिया. पुलिस ने जाम खोलने की कोशिश की. स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

मिश्रा के समर्थक पार्टी से वफादार रहे हैं, लेकिन टिकट विवाद ने दरार पैदा कर दी. पार्टी हाईकमान अब स्थिति संभालने में जुटा है. अगर बगावत जारी रही तो BJP को नुकसान हो सकता है. आगे क्या होता है, यह देखना होगा. कुल मिलाकर यह स्थानीय नेतृत्व और हाईकमान के बीच टकराव का उदाहरण है.