सारी दुनिया आश्चर्यचकित… UPI पर रिकॉर्ड ट्रांजेक्शन, लगभग ₹30 लाख करोड़ का पेमेंट!

पड़ोस की दुकान पर आप खरीदारी करने गए। आपने 17 रुपये का सामान लिया और 100 का नोट दिया। दुकानदार कहता है, खुले पैसे दो या यूपीआई (Unified Payments Interface) कर दो। आप अपना मोबाइल फोन निकालते हैं, क्यूआर कोड स्कैन करते हैं और पेमेंट हो जाता है। इसी आसानी की वजह से यूपीआई (UPI) ने इतिहास बना दिया है। जी हां, बीते मई महीने के दौरान कुल 29.90 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ।

नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया या एनपीसीआई (NPCI) के आंकड़ों के मताबिक बीते मई महीने में करीब 30 लाख करोड़ रुपये का यूपीआई ट्रांजेक्शन हुआ जो कि एक साल पहले के इसी महीने के मुकाबले 19 फीसदी ज्यादा है। यही नहीं, एक महीने पहले यानी अप्रैल 2026 के मुकाबले भी यह तीन फीसदी ज्यादा है। मई 2026 में कुल 23.2 अरब ट्रांजेक्शन हुए जबकि अप्रैल 2026 में 22.35 अरब ट्रांजेक्शन हुए थे।

यूपीआई करना बेहद सरल हो गया है। देश में जैसे-जैसे स्मार्टफोन रखने वालों की संख्या बढ़ी, वैसे-वैसे इसकी स्वीकार्यता बढ़ी। यही नहीं, अब तो पारंपरिक फोन में भी यूपीआई पेमेंट (UPI Payment) की सुविधा आने लगी है। यही नहीं इससे पेमेंट स्वीकारने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। अब चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स और हवाई अड्डे तक में यूपीआई स्वीकार किया जा रहा है। बस, ऑटो सब जगह इसका जलवा दिख रहा है।

छोटे पेमेंट ज्यादा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘पेमेंट्स सिस्टम्स रिपोर्ट’ के मुताबिक यूपीआई का ‘औसत टिकट साइज’ (प्रति लेनदेन की औसत रकम) घटी है।
साल 2021 में यह 1,848 रुपये था जो कि साल 2025 में घट कर 1,313 रुपये रह गया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब आम लोग बड़ी खरीदारी के साथ-साथ छोटी-छोटी चीजों (जैसे किराना, सब्जी या चाय) के लिए भी नकद के बजाय डिजिटल पेमेंट का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं।

यूपीआई के पीछे एनपीसीआई की पूरी टीम है। एनपीसीआई असल में भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की एक संयुक्त पहल है। यह भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए एक ‘अम्ब्रेला संगठन’ है। यह ग्राहकों के बीच और व्यापारियों के स्तर पर रियल-टाइम (तत्काल) पेमेंट सुनिश्चित करता है, जिससे अर्थव्यवस्था में पैसे का प्रवाह बिना किसी बाधा के बहुत तेज हो जाता है।