वंदे मातरम पर रार शुरू, भाजपा का आरोप-सोनिया ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश की:, कांग्रेस – खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं

नई दिल्ली. कांग्रेस मुख्‍यालय में स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडोत्‍तोलन का कार्यक्रम ने एक नया विवाद को जन्म दे दिया है. दरअसल, कांग्रेस मुख्‍यालय में वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी बातचीत करने लगीं और अपना स्‍थान भी बदलने लगीं. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. भाजपा ने इसे वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी के हावभाव पर निशाना साधा. इसके बाद कांग्रेस को इस मामले में सफाई देनी पड़ी है. अब वंदे मातरम को के गायन को लेकर दोनों दलों में रार शुरू हो गई है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला शांत हो जाएगा या फिर यह कानूनी रूप धारण कर सकता है. क्या है वंदे मातरम को लेकर सरकार का नया आदेश? अगर कोई शख्स इसका उल्लंघन करता है तो कानून में क्या हैं प्रावधान?

यह विवाद तब खड़ा हुआ जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाने लगा कि वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच कुछ असहजता दिखी. इस पर विवाद बढ़ता देख कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने स्थिति स्पष्ट की. तारिक अनवर ने कहा, ‘वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस में कोई विवाद नहीं था. असल बात यह थी कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भीषण गर्मी और धूप में करीब 15 मिनट से लगातार खड़े थे. उनकी उम्र का ध्यान रखते हुए सोनिया गांधी चाहती थीं कि उनके लिए एक कुर्सी लाई जाए ताकि वे बैठ सकें. बस इतनी सी बात थी, जिसे बीजेपी ने तिल का ताड़ बना दिया.’

कांग्रेस की सफाई के बाद बीजेपी राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने तीखे सवाल दागे और पार्टी पर निशाना साधा. प्रदीप भंडारी ने कहा, ‘अगर केवल कुर्सी की ही बात थी, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चेहरे इतने गुस्से से भरे क्यों दिख रहे थे? कांग्रेस नेता यह भी क्यों कह रहे हैं कि पूरा वंदे मातरम नहीं गाया जाना चाहिए? सच्चाई यह है कि आज की कांग्रेस पार्टी नक्सली मानसिकता से ग्रसित हो चुकी है और यह अब इंडियन नेशनल कांग्रेस नहीं रही.’

इस सियासी बहस के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस मामले में कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज हो सकती है? किसी सार्वजनिक या राजनीतिक कार्यक्रम में अगर वंदे मातरम के गायन को बीच में रोका जाता है या जानबूझकर बाधा डाली जाती है, तो विरोधी दल इसकी शिकायत पुलिस में कर सकते हैं. यदि इस मुद्दे पर कोई जनहित याचिका या आपराधिक शिकायत दर्ज होती है, तो अदालत यह जांच करेगी कि क्या राष्ट्रगीत का जानबूझकर अनादर करने या विघ्न डालने की कोई नीयत थी या यह सिर्फ एक प्रशासनिक समन्वय की कमी थी.

हाल ही में संसद द्वारा पारित राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) कानून, 2026 (Prevention of Insults to National Honour Amendment Act, 2026) के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है. ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसमें विघ्न उत्पन्न करना अब दंडनीय अपराध है. यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगीत के गायन को रोकने या उस सभा में व्यवधान डालने का दोषी पाया जाता है, तो उसे 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के तहत, आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान एक साथ गाए जाने पर पहले वंदे मातरम गाया जाएगा और सभा में उपस्थित सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य है.

आजादी के 80वें वर्ष में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के नए कानून और इसके सम्मान को लेकर केंद्र सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है. ऐसे में कांग्रेस मुख्यालय की इस घटना पर बीजेपी लगातार हमलावर है और आने वाले दिनों में यह सियासी रार अदालती गलियारों तक भी खिंच सकती है, यह एक बड़ा सवाल है.