सांवलिया सेठ के दरबार में धनवर्षा.. भंडार से निकले 22.80 करोड़, 1.7 किलो सोना और 99 किलो चांदी

उदयपुर : मेवाड़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री सांवलिया सेठ मंदिर में मासिक भंडार की गणना पूरी कर ली गई है. इस बार मंदिर को भक्तों की ओर से कुल 22 करोड़ 80 लाख 69 हजार 395 रुपए की भेंट प्राप्त हुई है. भंडार खुलने के बाद यह गणना मंदिर प्रशासन की देखरेख में विधिवत प्रक्रिया के तहत की गई, जिसमें सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मंदिर प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मासिक भंडार से प्राप्त कुल राशि में से भेंट कक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से 6 करोड़ 51 लाख 35 हजार 525 रुपए की आय हुई है. शेष राशि दान पात्रों के माध्यम से प्राप्त हुई, जिसे चरणबद्ध तरीके से गिना गया. गणना कार्य में मंदिर ट्रस्ट के अधिकारी, कर्मचारी एवं बैंक प्रतिनिधि मौजूद रहे, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारु रूप से संपन्न हो सके.

नकद राशि के अलावा इस बार भक्तों द्वारा की गई सोना-चांदी की भेंट भी उल्लेखनीय रही. मासिक भंडार से कुल 1 किलो 785 ग्राम 910 मिलीग्राम सोना तथा 99 किलो 844 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है. यह बहुमूल्य धातुएं भी विधिवत तौल कर मंदिर रिकॉर्ड में दर्ज की गईं. परंपरा के अनुसार सोना-चांदी को मंदिर के सुरक्षित भंडार में जमा किया जाएगा.

मंदिर प्रशासन ने बताया कि श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण भंडार से प्राप्त दान राशि और आभूषण हैं. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार नकद, ऑनलाइन दान और आभूषण भेंट कर रहे हैं. ऑनलाइन दान की राशि में भी हर माह इजाफा देखने को मिल रहा है, जिससे डिजिटल माध्यमों पर भक्तों का भरोसा स्पष्ट होता है.

भंडार गणना के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष सावधानी बरती गई. पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी के बीच पूरी प्रक्रिया पूरी की गई. गणना समाप्त होने के बाद राशि को बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, भंडार से प्राप्त दान राशि का उपयोग मंदिर विकास कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, धार्मिक आयोजनों तथा जनकल्याण से जुड़े कार्यों में किया जाता है. सांवलिया सेठ के प्रति अटूट आस्था और विश्वास के चलते हर माह भंडार की राशि नए रिकॉर्ड बना रही है, जिससे यह मंदिर प्रदेश ही नहीं, देशभर में श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.