वैज्ञानिकों ने लैब में तैयार किया इंसान का ‘असली’ पेसमेकर, खुद-ब-खुद धड़क रहा है दिल!
मेडिकल साइंस की दुनिया में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी कामयाबी हासिल कर ली है, जो आने वाले समय में दिल के इलाज की पूरी तस्वीर ही बदल देगी. वैज्ञानिकों ने पहली बार लैब के अंदर इंसानी स्टेम सेल्स की सहायता से दिल का असली मास्टर कंडक्टर यानी धड़कन पैदा करने वाला पेसमेकर तैयार कर लिया है. भारत के पड़ोसी मुल्क चीन के वैज्ञानिकों ने इस काम में सफलता हासिल की है.
सबसे अच्छी और राहत भरी बात यह है कि लैब में उगाया गया यह छोटा सा जैविक अंग बिल्कुल असली इंसान के दिल की तरह खुद-ब-खुद धड़क रहा है. इस सफलता के बाद अब यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में हार्ट पेशेंट्स के अंदर मेटल के नकली पेसमेकर लगवाने, सर्जरी के खतरों और कुछ सालों बाद बैटरी बदलने के झंझट से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा.
हमारे दिल के दाहिने हिस्से में मौजूद होता है साइनोएट्रियल नोड, जो एक मास्टर कंडक्टर की तरह काम करता है. यह लगातार बिजली के सिग्नल जनरेट करता है, जिससे हमारा दिल सही रफ्तार से धड़कता रहे और पूरे शरीर में खून का दौरा चलता रहे. अगर यह हिस्सा काम करना बंद कर दे, तो दिल की धड़कन खतरनाक रूप से धीमी हो सकती है या रुक भी सकती है. चीन के शंघाई में चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज और फुदान यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने ह्यूमन प्लूरिपोटेंट स्टेम सेल्स का इस्तेमाल करके इस 3D ऑर्गनॉइड यानी लैब में तैयार किया छोटा अंग तैयार किया है. यह रिसर्च स्टेम सेल रिसर्च जर्नल में पब्लिश हुई है.
वैज्ञानिकों ने न सिर्फ इस नोड को बनाया, बल्कि इसे नसों के एक नकली नेटवर्क से भी कनेक्ट किया, जिससे यह पता लगाया जा सके कि हमारा नर्वस सिस्टम दिल की धड़कन को कैसे कंट्रोल करता है. टेस्ट के दौरान यह सफल रहा और इसने बिल्कुल असली दिल की तरह सिग्नल ट्रांसफर किए. जब इस पर दवाओं का असर देखा गया, तो इसने असली दिल की तरह ही रिएक्ट किया.
दिल की धड़कन से जुड़ी बीमारी को ठीक करने के लिए, अभी बॉडी के अंदर इलेक्ट्रॉनिक पेसमेकर लगाया जाता है. लेकिन इसकी अपनी कुछ कमियां हैं, जैसे इन्फेक्शन का खतरा, 10-15 साल में बैटरी खत्म होने की टेंशन और शरीर के हिसाब से इसका साइज न बदल पाना. लेकिन इस नई कामयाबी से दिल की बीमारी का स्थायी इलाज मिल सकता है.
