वैज्ञानिकों के हाथ लगा चंद्रमा का ‘केमिकल कोड’
आर्टेमिस-II मिशन के बीच, वैज्ञानिकों ने अपोलो 17 मिशन द्वारा लाए गए चंद्रमा के पत्थरों में ‘इल्मेनाइट’ खनिज का एनालिसिस किया है. एडवांस्ड इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के जरिए पता चला कि चंद्रमा की प्राचीन चट्टानों में टाइटेनियम के केमिकल सिग्नेचर छिपे हैं. यह खोज बताती है कि करीब 3.8 अरब साल पहले चंद्रमा के आंतरिक हिस्से में ऑक्सीजन की उपलब्धता कैसी थी. यह रिसर्च पृथ्वी और चंद्रमा के साझा इतिहास को समझने में मील का पत्थर साबित हो सकती है. वैज्ञानिकों की एक प्रमुख थ्योरी के अनुसार, शुरुआती पृथ्वी से मंगल ग्रह के आकार की कोई बड़ी चीज टकराई थी. इस भीषण टक्कर से जो मलबा अंतरिक्ष में फैला, उसी से चंद्रमा का निर्माण हुआ. हालांकि, पृथ्वी के पास टेक्टोनिक प्लेट्स और वातावरण है जो सतह को बदलता रहता है, लेकिन चंद्रमा पर ऐसा कुछ नहीं है. इसी वजह से चंद्रमा की गहराई में आज भी सौर मंडल के शुरुआती इतिहास के राज दफन हैं. हाल ही में ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में छपी एक रिसर्च ने चंद्रमा के भीतर ऑक्सीजन की मौजूदगी को लेकर नए और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. चंद्रमा पर वायुमंडल न होने के कारण वहां की चट्टानें वैसी ही हैं जैसी वे अरबों साल पहले थीं. पृथ्वी पर मिट्टी और पानी के कारण पुरानी चट्टानें नष्ट हो जाती हैं, लेकिन चंद्रमा एक ‘भूगर्भीय लाइब्रेरी’ है.
