शार्क के खून में दौड़ रहा नशे का सामान, मंडराया बड़ा खतरा
समुद्र की गहराई में रहने वाले शार्क को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. हाल ही में हुए एक रिसर्च के अनुसार बहामास के तट के पास तैरने वाली शार्क के खून में कोकीन, कैफीन और दर्द निवारक दवाओं के अंश पाए गए हैं. यह खबर पर्यावरण प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए चिंता का कारण बन गई है. ‘एनवायरनमेंटल पॉल्यूशन’ में पब्लिश्ड एक स्टडी ने इसकी पुष्टि की गई है. ‘एनवायरनमेंटल पॉल्यूशन’ नाम की एक पत्रिका में पब्लिश्ड इस स्टडी के लिए साइंटिस्ट ने बहामास के एलुथेरा द्वीप के पास से 85 शार्क के खून के नमूने लिए, जिनके नतीजों ने सबको हैरान कर दिया. लगभग एक-तिहाई शार्क में कैफीन और सूजन कम करने वाली दवाएं पाई गईं. वहीं एक शार्क के खून में तो कोकीन तक की पुष्टि हुई है.
फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ पराना की बायोलॉजिस्ट नताशा वोस्निक और उनकी टीम का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इंसानों का दखल देना है. रिसर्च बताती है कि ये नशीले पदार्थ सीवेज से समुद्र तक पहुंच रहे हैं. वैज्ञानिक गोताखोरों को भी इसका मुख्य जिम्मेदार माना जा रहा है. रिसर्च के दौरान इन में से ज्यादातर शार्क को एक पुराने मछली फार्म के पास से उठाया गया था, जहां अक्सर गोताखोर आते-जाते हैं. वोस्निक बताती हैं कि, “लोग वहां जाकर पानी में पेशाब करते हैं या अपना कचरा फेंकते हैं, जिससे ये केमिकल सीधे पानी में मिल जाते हैं.” समुद्र में मौजूद चीजों को शार्क काटती हैं, जिससे वे अनजाने में इन पदार्थों की चपेट में आ जाती है.
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इन दवाओं को शार्क के हेल्थ पर क्या असर पड़ेगा. लेकिन साइंटिस्ट ने उनके मेटाबॉलिज्म में बदलाव जरूर देखा है. लंबे समय तक ऐसा होने से उनका व्यवहार बदल सकता है, जो मरीन इकोसिस्टम के लिए खतरनाक हो सकता है. यह रिसर्च बताती है कि साफ दिखने वाला समुद्र भी हमारे फैलाए प्रदूषण से अछूता नहीं है. अगर समय रहते समुद्री प्रदूषण और सीवेज पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इन जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.
