BJP नेता को राहत मिलने पर शिवसेना ने सामना में उठाए बॉम्बे HC के फैसले पर सवाल

राष्ट्रीय

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में बीजेपी नेता किरीट सोमैया को गिरफ्तारी से राहत दी है. शिवसेना इस फैसले पर लगातार सवाल उठा रही है. इसी बीच शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए लिखा, फंसानेवालों को राहत, माय लॉर्ड, ये क्या?

दरअसल, बीजेपी नेता किरीट सोमैया पर महाराष्ट्र पुलिस ने INS विक्रांत से जुड़े कथित घोटाले के मामले में केस दर्ज किया था. इस मामले में हाईकोर्ट ने राहत देते हुए किरीट सोमैया को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की है. ऐसे में शिवसेना ने इस फैसले पर अब सवाल उठाए हैं.

सामना में शिवसेना ने लिखा, ‘विक्रांत बचाओ’ के नाम पर करोड़ों रुपए जमा करके गबन करने वाले संदिग्ध अपराधियों को मुंबई उच्च न्यायालय ने अंतरिम जमानत दे दी है. पैसा एकत्रित करने वाली माफिया टोली के सूत्रधार किरीट सोमैया और उनके पुत्र बीते कुछ दिनों से फरार थे. कोर्ट द्वारा राहत दिए जाने के बाद वे प्रकट हो गए. उनके खिलाफ पैसों के गबन का मामला दर्ज है, उन्हें कोर्ट ने हर रोज पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाने को कहा है, ऐसे सोमैया कहते हैं कि महाविकास आघाड़ी के घोटाले बाहर निकालेंगे!

सामना में लिखा गया, सोमैया के खिलाफ ही घोटाले के संबंध में आपराधिक मामला दर्ज है. आईएनएस विक्रांत बचाओ के नाम पर उन्होंने बड़ी मात्रा में पैसे जुटाए. उसे राजभवन में जमा करेंगे, ऐसा वचन उन्होंने दिया था. लेकिन रकम बीच में ही गायब हो गई. राजभवन ने लिखित में कहा है कि वहां पैसे जमा नहीं हुए.

शिवसेना ने आगे कहा, कोर्ट ने पैसों के गबन के इस सबूत को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. खुद आरोपी के वकील कबूल करते हैं कि पैसे एकत्रित किए तो उसे राजभवन में जमा ही नहीं किया. आरोपी ने उसे भाजपा कार्यालय में जमा किया. भाजपा कार्यालय में विक्रांत का धन जमा किया और सैकड़ों लोगों से जालसाजी की गई. हमारी ये बात मानने को अदालत तैयार नहीं होगी तो हम किस युग से गुजर रहे हैं. आनेवाला समय कितना कठिन होगा यह समझ में आ जाएगा.

शिवसेना ने कहा, आरोपी सोमैया की जमानत अर्जी सेशन कोर्ट में रद्द हुई. जनता से पैसा एकत्रित किया गया, यह साफ दिख ही रहा है. ये जुटाए गए पैसे सोमैया पिता-पुत्र ने किसी को नहीं दिए और जुटाए गए पैसों का हिसाब भी नहीं रखा. इसलिए सेशन कोर्ट ने आरोपियों की जमानत ठुकरा दी. जमानत नकारते ही आरोपी बाप-बेटे फरार हो गए. अब हमारे हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देते समय क्या कहा, यह देखो- शिकायत कई साल के बाद दर्ज की गई है. 2013 से 2022 के बीच शिकायत दर्ज नहीं हुई और घोटाले के 57 करोड़ रुपए का आंकड़ा कहां से आया? प्रमाण क्या है? अखबारों में छपी खबरों के आधार पर शिकायतकर्ता ने मामला दर्ज कराया था.