कभी काली है बोलकर ताना मारते थे लोग, आज झुग्गी की ये लड़की है इंटरनेशनल ब्रांड का चेहरा
कभी मुंबई की जिन तंग गलियों में मलीशा खारवा को उनके सांवलेपन के लिए ताने मिलते थे, आज उसी रंग और आत्मविश्वास ने उन्हें इंटरनेशनल ब्रांड्स की पहली पसंद बना दिया है. धारावी की झुग्गियों से निकलकर मलीशा के लग्जरी ब्रांड्स के होर्डिंग्स तक पहुंचने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. 2008 में धारावी की झुग्गी बस्ती में जन्मीं मलीशा के घर की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि परिवार का पेट पालने के लिए उनके पिता बच्चों की पार्टियों में जोकर बनकर लोगों को हंसाते थे. लेकिन मलीशा के सपने बड़े थे. वह खुद को मैग्जीन के कवर पर छपते हुए देखना चाहती थीं, लेकिन समाज उन्हें यह कहकर ताने मारता था कि तू सांवली है, तुझे कौन मैग्जीन में छापेगा.
साल 2020 मलीशा की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. हॉलीवुड एक्टर रॉबर्ट हॉफमैन की नजर जब उन पर पड़ी, तो उनमें उन्हें एक इंटरनेशनल स्टार नजर आया. हॉफमैन ने मलीशा की कहानी सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंचाया, और देखते ही देखते स्लम प्रिंसेस का नाम वायरल हो गया. आज मलीशा फैशन वर्ल्ड में एक जाना-पहचाना नाम हैं. दिग्गज स्किनकेयर ब्रांड फॉरेस्ट एसेंशियल्स ने उन्हें अपने कैंपेन का चेहरा बनाया है. इसके अलावा वह वोग, कॉस्मोपॉलिटन, ग्राजिया और एले जैसी प्रतिष्ठित मैग्जीन की कवर पेज पर अपनी जगह बना चुकी हैं. इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर आज वह एक यूथ आइकॉन हैं.
मलीशा ने कहा, लोग कहते थे कि मैं काली हूं. मॉडल नहीं बन सकती. आज वही लोग मेरी कामयाबी पर तालियां बजाते हैं. उन्होंने कहा, आपकी परिस्थिति आपके फ्यूचर को तय नहीं करती, बल्कि आपका हौसला करता है.
