Sri Lanka Crisis: एक महीने में ही श्रीलंका हो गया बर्बाद, अब बिक रहा है 500 रुपये किलो चावल!

अंतरराष्ट्रीय

पड़ोसी देश श्रीलंका पिछले कुछ समय से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो जाने और कर्ज के भारी-भरकम बोझ ने पड़ोसी देश के ऊपर दिवालिया होने का खतरा पैदा कर दिया है. श्रीलंकाई करेंसी की वैल्यू डॉलर के मुकाबले लगभग आधी हो चुकी है, जिसके चलते कई जरूरी चीजों के भाव आसमान छू रहे हैं. डीजल-पेट्रोल और गैस खरीदने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि चीनी की कीमत 290 रुपये किलो तो चावल की कीमत 500 रुपये किलो हो चुकी है.

इतने महंगे हो चुके जरूरी सामान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अभी श्रीलंका में महंगाई की दर 17 फीसदी को भी पार कर चुकी है. यह पूरे दक्षिण एशिया के किसी भी देश में महंगाई का सबसे भयानक स्तर है. इसके चलते श्रीलंका के सामने आजादी के बाद का सबसे गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. अभी इस छोटे देश की स्थिति ऐसी है कि 1 कप चाय के लिए लोगों को 100 रुपये देने पड़ रहे हैं. इतना ही नहीं, ब्रेड और दूध जैसी जरूरी चीजों के दाम भी आसमान पर हैं. खबरों के अनुसार, अभी श्रीलंका में ब्रेड के एक पैकेट की कीमत 150 रुपये हो चुकी है. दूध का पाउडर 1,975 रुपये किलो हो चुका है, तो एलपीजी सिलेंडर का दाम 4,119 रुपये है. इसी तरह पेट्रोल 254 रुपये लीटर और डीजल 176 रुपये लीटर बिक रहा है.

ऐसे गिरी श्रीलंकाई करेंसी की वैल्यू

दरअसल श्रीलंकाई रुपये की वैल्यू पिछले कुछ दिनों में डॉलर के मुकाबले 46 फीसदी से ज्यादा कम हो चुकी है. मार्च में श्रीलंकाई रुपये की वैल्यू किस कदर कम हुई है, उसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 1 डॉलर के मुकाबले यह 201 से भी टूटकर 318 श्रीलंकाई रुपये पर आ चुकी है. इसकी तुलना अन्य देशों से करें तो 1 डॉलर की वैल्यू करीब 76 भारतीय रुपये, 182 पाकिस्तानी रुपये, 121 नेपाली रुपये, 45 मॉरीशस रुपये और 14,340 इंडोनेशियाई रुपये के बराबर है.

3 साल में यूं गायब हुआ विदेशी मुद्रा भंडार

श्रीलंकाई करेंसी और इकोनॉमी की इस बदहाली का कारण भारी-भरकम कर्ज है. श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार समाप्त होने की कगार पर है. महज तीन साल पहले श्रीलंका के पास 7.5 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जब वहां नई सरकार का गठन हुआ था. इसमें तेजी से गिरावट आई और जुलाई 2021 में यह महज 2.8 बिलियन डॉलर रह गया था. पिछले साल नवंबर तक यह और गिरकर 1.58 बिलियन डॉलर के स्तर पर आ चुका था. श्रीलंका के पास विदेशी कर्ज की किस्तें चुकाने लायक भी फॉरेक्स रिजर्व नहीं बचा है. आईएमएफ ने हाल ही में कहा है कि श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की कगार पर है. विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से श्रीलंकाई रुपये की वैल्यू भी कम हो रही है.

पड़ोसी देश के सिर पर इतने कर्ज का बोझ

आंकड़ों के अनुसार, अभी श्रीलंका पर 51 अरब डॉलर के कर्ज का बोझ है. अकेले चीन का ही श्रीलंका के ऊपर 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है. इसके अलावा श्रीलंका के ऊपर भारत और जापान जैसे देशों के अलावा आईएमएफ जैसे संस्थानों का भी लोन उधार है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2021 तक श्रीलंका के ऊपर कुल 35 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज था, जो अब 51 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है. आर्थिक संकटों से घिरे इस छोटे देश के ऊपर इस भारी-भरकम विदेशी कर्ज का ब्याज व किस्त चुकाने का भी बोझ है, जो हालात को और बिगाड़ रहे हैं.