धरती पर इंसान भी नहीं थे, तब बना होर्मुज स्ट्रेट…
अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग के बीच आज किसी चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह है होर्मुज जलडमरूमध्य है। इसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी जाता है। दुनिया के सबसे प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक माने जाने वाले इस संकरे समुद्री गलियारे से दुनिया का 20 फीसदी ऊर्जा व्यापार गुजरता है। फिलहाल यह जगह ईरान की ताकत और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए परेशानी की वजह बन गई है। लेकिन पानी की यह संकरी पट्टी आज आधुनिक दुनिया पर कैसे राज करती है, इसे जानने के लिए इतिहास की गहराई में झांकना होगा।
वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि इस जलडमरूमध्य की भूमिका लाखों साल पहले पृथ्वी की पपड़ी पर लिख दी गई थी। उस समय धरती पर पहला इंसान पैदा भी नहीं हुआ था। धरती की स्टडी से पता चलता है कि 6000 साल पहले फारस की खाड़ी का अस्तित्व ही नहीं था। उस समय न अरब था, न ईरान और उनके बीच से गुजरने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य।
धरती पर लाखों साल की हलचल
आज का अरब प्रायद्वीप लाखों वार्ष पहले गोंडवाना नामक विशाल दक्षिणी महाद्वीप में था। आज यह इलाका बदलाव के साथ अफ्रीका में बदल चुका है। इसके उत्तर में टेथीस महासागर था, जो इसे यूरेशिया के तटों से अलग करता था।
लगभग 180 मिलियन वर्ष पहले गोंडवाना में टूट शुरू हुई, जिससे भारतीय और अरब प्लेटें उत्तर की ओर बढ़ीं। लाखों सालों तक ये प्लेटें यूरेशियाई प्लेट की तरफ गति करती रहीं। इस दौरान उनके बीच टेथीस सागर संकरा होता गया।
आगे बढ़ते-बढ़ते अरब प्रायद्वीप यूरेशिया से टकराया तो पृथ्वी की पपड़ी (Crust) में मौजूद चट्टानें टक्कर के चलते मुड़ गईं और बड़ी-बड़ी चोटियों में बदल गई है। यह जाग्रोस पर्वत थे। एक विशाल पर्वतमाला, जो तुर्की से ईरान और फिर फारस की खाड़ी तक फैली हुई है।
जैसे अरब प्रायद्वीप का उत्तरी किनारा ऊपर उठा, उसके दक्षिण में स्थित बेसिन नीचे धंस गया। यह आगे चलकर फारस की खाड़ी बना। इसी तलहटी के नीचे चट्टानों की परत के नीचे तेल छिपा हुआ था। यह वही तेल था, जो टेथीस सागर के जमाने से चुपचाप बनता चला आ रहा था।
जाग्रोस पर्वत इस बेसिन की उत्तरी सीमा है, जबकि फारस की खाड़ी इसकी तलहटी बनाती है। स्टडी से पता चलता है कि जाग्रोस पवर्त पृथ्वी की पपड़ी को एक संकरे और उथले क्षेत्र में नीचे की ओर दबाते हैं। यही वजह है कि खाड़ी केवल 110 मीटर गहरी है और इसकी चौड़ाई 340 किलोमीटर तक है। दक्षिणी पूर्वी सिरे पर जहां ये पहाड़ समुद्र में मिलते हैं, वहां, अरब प्रायद्वीप और ईरान का तट इतने करीब आ जाते हैं कि उनके बीच का फासला महज 40 किमी का रह जाता है। इसी संकरे रास्ते को होर्मुज जलडमरूमध्य कहा जाता है, जो फारस की खाड़ी को खुले समुद्र (अरब सागर) से जोड़ता है।
