दिल्ली में सुनीता विलियम्स बोलीं- भारत आना घर वापसी जैसा, चांद पर जाना चाहती हूं, लेकिन….
भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने मंगलवार को कहा, इस समय दुनिया में अंतरिक्ष को लेकर एक तरह की होड़ (स्पेस रेस) चल रही है। कई देश चांद और अंतरिक्ष में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। लक्ष्य सिर्फ पहले पहुंचना नहीं है, बल्कि यह है कि इंसान सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक रहने लायक तरीके से चांद पर जाए। सुनीता ने यह बात दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर’ सेमिनार में कहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यह काम सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न हो और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले। सभी देश सहयोग के साथ आगे बढ़ें, बिल्कुल अंटार्कटिका मॉडल की तर्ज पर।

विलियम्स ने कहा कि भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे। वहीं, चांद पर जाने के सवाल पर मजाकिया लहजे में कहा, ‘मैं चंद्रमा पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे इजाजत नहीं देंगे। घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा।” 60 साल की विलियम्स हाल ही में नासा से रिटायर हुईं हैं। उन्होंने अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए हैं। 9 स्पेस वॉक भी किए हैं। सुनीता के भारत दौरे का शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि वह 20 जनवरी से पहले दिल्ली आई थीं। 21 जनवरी को यहां कई कार्यक्रम में भाग लिया है। इसके बाद वे केरल लिटरेचर फेस्टिवल में भी हिस्सा ले सकती हैं। यह फेस्टिवल 22 से 25 जनवरी के बीच है।
