अगले 30 साल में आएगी ‘महा सुनामी’! UNESCO की वार्निंग ने उड़ाए यूरोप के होश

यूनेस्को (UNESCO) ने एक ऐसी वार्निंग जारी की है, जिसने भूमध्य सागर के किनारे बसे देशों की नींद उड़ा दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 30 सालों के अंदर इस क्षेत्र में भयंकर सुनामी आने की संभावना है. यह एक कड़वी सच्चाई है, जिसके लिए दुनिया अभी तैयार नहीं है. जब हम ‘सुनामी’ (Tsunami) का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) या हिंद महासागर के विशाल तटों की तस्वीरें आती हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने एक ऐसी वार्निंग जारी की है, जिसने यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के देशों की नींद उड़ा दी है. मोंटपेलियर विश्वविद्यालय और यूनेस्को द्वारा की गई रिसर्च से पता चलता है कि अगले 30 सालों के अंदर भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में 1 मीटर से ऊंची सुनामी आने की संभावना 100% है. यह लहरें सुनने में छोटी लग सकती हैं, लेकिन घनी आबादी वाले तटीय शहरों के लिए ये काल साबित हो सकती हैं. UNESCO का कहना है कि यह खतरा टेक्टोनिक हलचल के कारण आने वाला है. क्योंकि यह इलाका अफ्रीकी और यूरेशियन प्लेटों के बीच में स्थित है, जिससे यहां आने वाले भूकंप समुद्र के नीचे की जमीन को हिला सकते हैं. इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन भी इसका एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे छोटी लहरें भी तटों पर बड़ी तबाही मचाने की ताकत रखती हैं.

यूनेस्को ने कुछ खास शहरों को चिन्हित किया है, जो इस खतरे के सबसे करीब हैं. इसमें मार्सिले (फ्रांस), अलेक्जेंड्रिया (मिस्र), इस्तांबुल (तुर्की), कान्स (फ्रांस) और हाइफा (इजराइल) जैसे मशहूर शहरों के नाम शामिल हैं. फ्रांस के मार्सिले में सुनामी का खतरा काफी ज्यादा है. वहीं, मिस्र का अलेक्जेंड्रिया शहर समुद्र में डूबने की कगार पर है. भूमध्य सागर में सुनामी का खतरा इसलिए ज्यादा रहता है, क्योंकि यहां समुद्र का विस्तार कम है. प्रशांत महासागर में सुनामी आने पर घंटों का समय मिलता है, लेकिन भूमध्य सागर में तटों की दूरी कम होने के कारण चेतावनी मिलने के बाद लोगों के पास सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए सिर्फ 20 से 30 मिनट का समय होगा. भूकंप के अलावा, समुद्र के नीचे होने वाले भूस्खलन भी यहां बड़ी लहरें पैदा कर सकते हैं.

आम तौर पर 1 मीटर की लहर छोटी लग सकती है, लेकिन सुनामी की लहरें सामान्य लहरों जैसी नहीं होतीं. सुनामी में केवल लहर नहीं, बल्कि पानी की एक पूरी दीवार होती है, जो मीलों तक अंदरूनी इलाकों में घुस जाती है. भूमध्य सागर के तटों पर मार्सिले (फ्रांस), अलेक्जेंड्रिया (मिस्र) और इस्तांबुल (तुर्की) जैसे घने बसे शहर हैं. यहां 1 मीटर की सुनामी भी हजारों लोगों के लिए काल बन सकती है. चूंकि भूमध्य सागर संकरा और उथला है, जिससे लहरों को फैलने की जगह नहीं मिलती और वे सीधे तटों से टकराकर ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं.

यूनेस्को के महानिदेशक का कहना है कि सुनामी को रोका नहीं जा सकता, लेकिन तैयारी से जान बचाई जा सकती है. 2004 की हिंद महासागर की सुनामी ने हमें सिखाया था कि जानकारी का अभाव कितना महंगा पड़ सकता है. भूमध्य सागर में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए अब अलर्ट रहने का समय आ गया है.

यूनेस्को ने दुनिया भर के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक मिशन शुरू किया है, जिसमें वह समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने की ट्रेनिंग दे रहा है. साथ ही यूनेस्को समुद्र में ऐसे आधुनिक सेंसर लगा रहा है, जो लहरों की आहट को सेकंडों में पहचान लें. इससे किनारों पर रहने वाले लोगों को जल्दी अलर्ट किया जा सकेगा. यूनेस्को का कहना है कि अब हर शहर के पास एक साफ ‘इवैक्यूएशन मैप’ होना अनिवार्य होगा.