सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुनवाई आज, SIR से जुड़ा एकतरफा फैसला लेने का आरोप

सुप्रीम कोर्ट आज CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। ये याचिकाएं स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल की गई हैं। आरोप है कि SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों को पलटने, ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलाने और SIR में मतदाताओं के नाम हटाने की SIT जांच की मांग की है। साथ ही CEC को अंतिम फैसला आने तक पद के कामकाज से अलग रखने की भी मांग की गई है।

CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले की सुनवाई करेगी।

याचिकाओं में कहा गया है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए गए।

पहली याचिका की मांगें

याचिका पटना के राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है। इसलिए इसके फैसले एकतरफा नहीं लिए जा सकते।
आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि विवादित कदम संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के अनुसार उठाए गए थे या नहीं।
अंतरिम राहत के तौर पर याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC पद से निलंबित करने की मांग की गई है।

दूसरी याचिका की मांगें

याचिका एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है। इसमें एकतरफा लिए गए 14 फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच कमीशन या SIT बनाने की मांग की गई है। इसमें साइबर सिक्योरिटी और IT एक्सपर्ट भी रखे जाएं।
प्रस्तावित जांच में ECINet और ERONet डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।
SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए जाने की परिस्थितियों की जांच भी मांगी गई है।

याचिका में सक्षम प्राधिकरण को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज करने और मुकदमा शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह कार्रवाई ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और जिम्मेदार पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ मांगी गई है।

याचिका में धारा 32 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान में मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन या सुधार से जुड़े सरकारी कर्तव्य के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान है।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि Form 6 में बिना अनुमति बदलाव किया गया। इसके अलावा, वोटर लिस्ट के डेटाबेस को सेंट्रलाइज करने का भी आरोप लगाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि ECINet सिस्टम के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल नहीं किए गए। इसमें ECI के नाम पर बताए गए मतदाताओं को शामिल करने को चुनौती देते हुए पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख अपीलें दाखिल किए जाने का भी जिक्र है।