सुप्रीम कोर्ट ने देश की सबसे अमीर महापालिका की कमिश्नर का वेतन रोका, फटकार और 5 लाख का जुर्माना
देश की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. बोरीवली में BEST बस स्टेशन और डिपो के लिए आरक्षित भूमि से अवैध अतिक्रमण नहीं हटाने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े और संबंधित अधिकारियों के नवंबर महीने के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है. साथ ही अदालत ने अवमानना की कार्रवाई शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया और BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
ये मामला मुंबई के बोरीवली क्षेत्र में BEST बस स्टेशन और डिपो के लिए आरक्षित भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाए जाने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस जमीन को खाली कराने के निर्देश दे चुका था, लेकिन बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद BMC की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई. बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पर गंभीर नाराजगी जताई और कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का मामला है.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े के खिलाफ कारण बताओ अवमानना नोटिस जारी किया. अदालत ने आदेश दिया कि कमिश्नर और इस मामले से जुड़े संबंधित अधिकारियों का नवंबर माह का वेतन 1 दिसंबर 2026 तक रोका जाए. बेंच ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि आदेशों के पालन में और देरी हुई तो आगे और कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है.
सुनवाई के दौरान BMC की ओर से कहा गया कि कार्रवाई से पहले कुछ मराठी दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद कराया जाना आवश्यक था, इसलिए समय लगा. इस दलील पर अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. कोर्ट ने सवाल किया कि हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारियों को क्या मराठी भाषा नहीं आती. अदालत ने इस स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और इसे आदेशों के पालन में देरी का उचित कारण मानने से इनकार कर दिया.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि रिकॉर्ड देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के बीच मिलीभगत हो सकती है. अदालत ने कहा कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई न होना गंभीर चिंता का विषय है और यह आदेशों के जानबूझकर उल्लंघन की ओर संकेत करता है. बेंच ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा.
BMC ने अतिक्रमण हटाने और न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया. अदालत ने माना कि पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है और अब और देरी स्वीकार नहीं की जा सकती.
आदेशों का पालन न करने और मामले में देरी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने BMC पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. अदालत ने कहा कि न्यायालय के आदेशों को लागू करना प्रशासनिक एजेंसियों की जिम्मेदारी है और यदि आदेशों की अवहेलना होगी तो जवाबदेही तय की जाएगी.
