सस्पेंड-शिक्षक ने फर्जी-लेटरहेड से खुद की बहाली आदेश जारी किया, शब्दावली संदिग्ध लगने पर मामले का खुलासा
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में निलंबित शिक्षक ने ई-मेल के जरिए खुद की बहाली का आदेश जारी कर दिया। आरोपी ने सामान्य प्रशासन विभाग के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर आदेश तैयार किया और उच्च अधिकारियों को भेज दिया। आदेश की भाषा और शब्दावली संदिग्ध लगने पर मामले का खुलासा हुआ। इस मामले में संभागीय शिक्षा कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि अगर यह ई-मेल फर्जी साबित होता है तो शिक्षक के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा मामला पुलिस को सौंप दिया जाएगा। संभागीय शिक्षा कार्यालय का कहना है यह आपराधिक मामला है। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी मामले में आगे की कार्रवाई करेंगे। जानकारी के मुताबिक निलंबित शिक्षक का नाम शेषनारायण साहू है, जो प्राइमरी स्कूल खुर्सीडीह में पदस्थ था। दो-तीन महीने पहले शेषनारायण के खिलाफ हेडमास्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत भेजी थी, जिसमें बताया गया था कि शेषनारायण समय पर स्कूल नहीं आता।
इसके अलावा वह शालेय कार्यों में सहयोग नहीं करते थे और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन करते थे। स्कूल की एक्टिविटी में हेल्प नहीं करता और सीनियर अफसरों के आदेश का उल्लंघन करता है। शेषनारायण पर शिकायत करने की धमकी देने और ग्रामीणों को भड़काने का भी आरोप था। इन आरोपों की जांच कराई गई, जिसमें उसकी पुष्टि हुई। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में शिक्षक की अनियमित उपस्थिति और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की पुष्टि हुई। इसके कारण बच्चों की पढ़ाई और शालेय गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भी उनके आचरण को लेकर असंतोष था।

जांच में पाया गया कि शिक्षक का यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। इन सभी तथ्यों के आधार पर संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग दुर्ग ने 21 जनवरी 2026 को शिक्षक शेषनारायण साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, छुरिया (जिला राजनांदगांव) निर्धारित किया गया था।
मामले में नया मोड़ तब आया, जब 7 अप्रैल 2026 को ईमेल के जरिए शिक्षक की बहाली का आदेश सामने आया। आदेश में दावा किया गया कि विभागीय जांच के बाद निलंबन समाप्त कर दिया गया है। शिक्षक को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुपेला में दोबारा पदस्थ किया गया है। आदेश पूरी तरह आधिकारिक नजर आ रहा था, जिससे कुछ समय के लिए विभाग में भ्रम की स्थिति बन गई।
संभागीय संयुक्त संचालक आरएल ठाकुर ने बताया कि ईमेल मिलते ही उसकी भाषा पर संदेह हुआ। कुछ शब्द ऐसे थे, जो सामान्य शासकीय आदेशों में इस्तेमाल नहीं होते। इसी आधार पर संबंधित कार्यालय से संपर्क कर आदेश की पुष्टि की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि ई-मेल शिक्षक के निजी आईडी से भेजा गया था। इससे शक और गहरा गया कि बहाली आदेश फर्जी हो सकता है और इसे खुद शिक्षक ने तैयार किया हो। अगर यह बात सही साबित होती है, तो मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।
