ताइवान से दोस्ती पड़ी भारी, चीन ने इन मुल्कों के मंत्रियों को दी ‘सजा’
चीन हमेशा से ताइवान को लेकर बेहद ही संवेदनशील रहा है. वह हमेशा चीन को अपना हिस्सा मानता रहा है. हालांकि ताइवान इस दावे से उलट खुद को संप्रभु मुल्क मानता है. ऐसे में यदि कोई देश ताइवान के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश करता तो बीजिंग में अधिकारियों के कान खड़े हो जाते हैं. इस कड़ी में चीन ने पराग्वे और बेलीज को लेकर कड़े फैसले लिए हैं.
चीन ने सोमवार को पराग्वे के संचार मंत्री और बेलीज के विदेश मंत्री पर प्रतिबंध लगा दिए. यह कदम ताइवान के साथ दोनों देशों के संबंधों को लेकर उठाया गया है. पराग्वे और बेलीज उन 12 देशों में शामिल हैं, जिनके ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध हैं. बेलीज़ मध्य अमेरिका के पूर्वी तट पर एक स्वतंत्र देश है.
हालांकि, ये प्रतिबंध काफी हद तक प्रतीकात्मक हैं, क्योंकि ताइवान के सहयोगी देशों के मंत्री आमतौर पर चीन की यात्रा नहीं करते हैं. चीन के इस फैसले पर पराग्वे और बेलीज की ओर से कोई बयान नहीं आया है. ताइवान के विदेश मंत्रालय ने भी तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने इन कदमों के पीछे राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा का हवाला दिया. मिनिस्ट्री ने कहा कि बेलीज और पराग्वे के कुछ राजनेता अपने देशों के ताइवान के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने की वकालत करके चीन विरोधी रुख अपना रहे हैं.
ताजा प्रतिबंध के बाद पराग्वे और बेलीज के मंत्री हांगकांग और मकाऊ में भी एंट्री नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा, चीनी संगठनों और व्यक्तियों को संबंधित अधिकारियों के साथ लेन-देन करने, सहयोग करने या अन्य गतिविधियों में शामिल होने से भी प्रतिबंधित किया गया है.
बता दें कि बेलीज के विदेश मंत्री फ्रांसिस फोंसेका ने पिछले महीने बेलीज़ में अपने ताइवानी समकक्ष लिन चिया-लुंग से मुलाकात की थी. वहीं जून में पराग्वे के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री गुस्तावो विलाते ने पराग्वे में ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-ची से मुलाकात की थी.
ताइवान में बेलीज के दूतावास ने अपने फेसबुक पेज पर संदेश भी पोस्ट किया था. इसमें 11 अक्टूबर को दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने की 37वीं वर्षगांठ मनाई गई थी.
इससे पहले इस तरह के प्रतिबंध मुख्य रूप से उन पश्चिमी देशों के नेताओं और राजनेताओं पर भी लगाए गए थे, जिन्होंने ताइवान का समर्थन किया था. चीन अक्सर ऐसे मुल्कों पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत प्रतिबंध लगाता रहा है.
हाल के दिनों में चीन ने ताइवान के बचे हुए राजनयिक सहयोगी देशों पर ताइवान के साथ संबंध तोड़ने का दबाव बढ़ा दिया है. ताइवान से संबंध तोड़ने वाला आखिरी देश प्रशांत महासागर में स्थित छोटा-सा राष्ट्र नाउरू था, जिसने 2024 में ऐसा किया. इससे पहले, 2023 में होंडुरास ने भी ताइवान के साथ दशकों पुराने अपने राजनयिक रिश्ते खत्म कर लिए थे.
