118 साल से खड़ा है वह इमली का पेड़, जिसने बाढ़ में 150 लोगों की बचाई थी जान
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के अफ़ज़लगंज स्थित ऐतिहासिक उस्मानिया जनरल अस्पताल परिसर में आज भी एक विशाल और पुराना इमली का पेड़ पूरी शान और मजबूती के साथ खड़ा है. आम राहगीरों के लिए यह देखने में भले ही एक सामान्य और पुराना पेड़ लगे, लेकिन इसका इतिहास शहर की सबसे बड़ी और खौफनाक प्राकृतिक आपदा से गहराई से जुड़ा हुआ है. यह वही ऐतिहासिक और चमत्कारी पेड़ है, जिसकी मजबूत डालियों ने आज से करीब 118 साल पहले आई मूसी नदी की भीषण बाढ़ में लगभग 150 लोगों को मौत के मुंह से खींचकर उन्हें नई जिंदगी दी थी.
इस ऐतिहासिक पेड़ और उस खौफनाक रात की कहानी बताते हुए उस्मानिया जनरल अस्पताल के शमीम खान पाशा कहते हैं कि तारीख थी 28 सितंबर 1908. उस दिन हैदराबाद में मूसलाधार बारिश आफत बनकर टूटी थी. लगातार और भारी बारिश के चलते शहर के बीचों-बीच बहने वाली मूसी नदी उफान पर आ गई और उसने अपने किनारे तोड़ दिए. देखते ही देखते शहर की घनी बस्तियां पूरी तरह जलमग्न हो गईं और सैलाब ने रौद्र रूप ले लिया. पानी का बहाव और रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने या सुरक्षित जगहों पर भागने तक का मौका नहीं मिला. चारों तरफ केवल पानी, तबाही और चीख-पुकार का खौफनाक मंजर था.
उस भयानक रात में जब लोगों को जान बचाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था, तब अफज़लगंज के पास मौजूद इसी विशाल इमली के पेड़ ने डूबते लोगों को उम्मीद की एक किरण दिखाई. बाढ़ के तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच कुछ लोग हिम्मत करके उस पेड़ की मजबूत डालियों पर चढ़ गए और फिर उन्होंने नीचे संघर्ष कर रहे दूसरों को भी ऊपर खींचना शुरू कर दिया. देखते ही देखते करीब 150 महिला, पुरुष और बच्चे अपनी जान बचाने के लिए उस पेड़ की शाखों पर जा बैठे.
पूरी रात मूसलाधार बारिश होती रही. लोग बुरी तरह भीगे हुए, ठंड से कांपते हुए और खौफ के साए में पेड़ की डालियों को मजबूती से पकड़े रहे. नीचे मूसी नदी का उफनता मटमैला पानी सब कुछ बहा ले जाने पर आमादा था, लेकिन इस दरख़्त (पेड़) ने किसी भी शरणार्थी का साथ नहीं छोड़ा और अपनी जड़ों पर मजबूती से टिका रहा. अगली सुबह जब बारिश थमी और नदी का जलस्तर नीचे उतरा, तब जाकर सभी लोग सुरक्षित नीचे आ सके.
समय के साथ हैदराबाद शहर पूरी तरह से बदल गया. बाढ़ से हुए नुकसान के बाद यहां आधुनिक इमारतें बन गईं और अब यह शहर एक हाई-टेक महानगर का रूप ले चुका है. लेकिन यह ऐतिहासिक इमली का पेड़ आज भी उस्मानिया अस्पताल के अहाते में एक ‘प्राण धात्री’ के रूप में मौजूद है. यह दरख़्त सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि उस भयानक त्रासदी और 150 अनमोल जिंदगियों के बचने की एक जिंदा और मूक गवाही है, जिसे हैदराबाद के लोग आज भी सम्मान के साथ याद करते हैं.
