‘सीधा वार करेगा तेहरान…’, US-इजरायल को ईरान की खुली धमकी

इजरायल ने शनिवार सुबह ईरान के खिलाफ “प्रीवेंटीव अटैक” यानी एहतियाती सैन्य कार्रवाई की शुरुआत की है. इजरायल के रक्षा मंत्री ने इस ऑपरेशन की आधिकारिक पुष्टि की है. इसी के साथ, इजरायली सेना ने पूरे देश में अपने नागरिकों के लिए “प्रोएक्टिव अलर्ट” जारी किया और सायरन बजाए ताकि संभावित ईरानी मिसाइल हमलों से पहले लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें. इजरायल को हमले में अमेरिका का भी साथ मिला है. यानि यह संयुक्त हमला रहा. इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है और तेल अवीव पर मिसाइलों से हमला किया. ईरान को दो मुल्कों से समर्थन मिला है.

वहीं दूसरी ओर, ईरान की राजधानी तेहरान में कई जोरदार धमाकों की खबर आई है. स्थानीय मीडिया और चश्मदीदों के अनुसार, राजधानी के मध्य हिस्से में कई विस्फोट हुए हैं. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक वार्ताएं जारी हैं. गुरुवार को जिनेवा में दोनों पक्षों के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई थी और आज नए दौर की बातचीत प्रस्तावित थी. लेकिन इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने इस कूटनीतिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान को “बहुत कठिन” और “बहुत खतरनाक” बताया था. अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को बढ़ते खतरे के मद्देनजर इजरायल से गैर-जरूरी दूतावास कर्मियों को हटाने की अनुमति दी थी. ईरान पर हुए हमले की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें साफ नजर आ रहा है कि इजरायल ने तेहरान समेत अन्य शहरों में तबाही मचा दी है.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि अगर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होता है तो इसके अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि फ्रांस अपने करीबी साझेदारों की मांग पर उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी संसाधन तैनात करने को तैयार है.ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरानी सेना अमेरिका और इजरायल के हमलों की जड़ तक जाकर करारा जवाब देगी. उनका कहना है कि ईरान अपनी रक्षा कर रहा है और अगर उसकी इस कार्रवाई को रोकने या कमजोर करने की कोशिश की गई तो उसे भी वैध निशाना माना जाएगा. यानी जहां से हमला या दखल होगा, ईरान वहीं जवाबी कार्रवाई करेगा.

ईयू की उपाध्यक्ष कया कलास ने कहा है कि मध्य पूर्व में ताजा घटनाक्रम बेहद खतरनाक हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान की सरकार ने हजारों लोगों की जान ली है और उसके बैलिस्टिक मिसाइल व परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ आतंकी संगठनों को समर्थन वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और परमाणु मुद्दे समेत कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है. कलास ने कहा कि उन्होंने इजरायल के विदेश मंत्री और क्षेत्र के अन्य नेताओं से बात की है तथा यूरोपीय संघ अरब देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक रास्ते तलाश रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन प्राथमिकता है, यूरोपीय नागरिकों की वापसी में दूतावास सक्रिय हैं, गैर-जरूरी कर्मचारियों को क्षेत्र से निकाला जा रहा है और लाल सागर में यूरोपीय संघ का नौसैनिक मिशन सतर्क स्थिति में है ताकि समुद्री मार्ग खुला रखा जा सके.