आज आएगा महाप्रलय! खुद को अवतार बताने वाले घाना के Eboh Noah की भविष्यवाणी से डरकर जुटे हजारों लोग

घाना में एक शख्स ने खुद को आधुनिक समय का नोआ घोषित कर लिया है. उसने बाइबल में नोआ (Noah) की कहानी से खुद को जोड़ते हुए एक बड़ी नाव (ऑर्क ऑफ नूह) भी बनाई है और उसका दावा है कि 25 दिसंबर को भारी बारिश के साथ प्रलय वाली बाढ़ आएगी और इस नाव में शरण लेकर ही लोग जान बचा सकते हैं. इस दावे के बाद इसे सच मानकर हजारों लोग डरकर उसकी बनाई नावों पर शरण लेने भी पहुंच गए. सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोगों को एबो की नाव में अपनी जगह पहले से बुक करते देखा जा सकता है. काफी दिनों से ये शख्स चर्चा में है और सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. उसमें वो 25 दिसंबर को आने वाली बाढ़ की चेतावनी देता और बाइबल की कहानी में वर्णित तबाही से बचाने वाला आर्क (नाव) बनाता दिखाई देता है.

घाना वेब की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स का नाम एबो नोआ (Eboh Noah) है. एबो ने दावा किया है कि गॉड ने उन्हें चेतावनी दी थी कि दुनिया 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन खत्म हो जाएगी. उसने दावा किया है कि गॉड भारी बारिश और बाढ़ से दुनिया को तबाह कर देंगे. इसलिए परमेश्वर ने उसे नाव बनाने का आदेश दिया है.
एबो का दावा है कि उसने दस नावें बनाई हैं. उसके दावे के मुताबिक 25 दिसंबर से शुरू होकर तीन साल तक लगातार बारिश होगी. इसलिए वह नाव बना रहा है, ताकि इस दौरान वह बचा रह सके और अपने अनुयायियों को भी बचा सके.

घाना का ये शख्स जो खुद नोआ (Noah) होने का दावा करता है, उसकी उम्र 30 साल है. यह अपना नाम एबो जीसस या एबो नोआ बताता है. द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह शख्स पहली बार तब सुर्खियों में आया था, जब अगस्त में “क्या होगा और कैसे होगा” शीर्षक से एक यूट्यूब वीडियो अपने अनुयायियों के लिए बनाया.

इसमें उसे यह भी कहा कि उसकी योजना तीन साल की पूरी अवधि के लिए किसी एक नाव पर रहने की है. इसके बाद से उसके कई वीडियो वायरल हो रहे हैं. वायरल क्लिप में एबो और उनके सहायकों को कई नावों पर हथौड़ा मारते हुए दिखाया गया है जो इतनी छोटी दिखती हैं कि वे उस तरह की भीषण बाढ़ में जीवित नहीं रह पाएंगी जिसकी उन्होंने भविष्यवाणी की है.

बाइबल में नोआ की कहानी के मुताबिक, उसे भगवान ने एक विशाल नाव बनाने का आदेश दिया था. इस नाव में नूह का परिवार और पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव-जंतु के एक-एक जोड़े को बचाकर रखा गया था. महाप्रलय के दौरान 40 दिन और 40 रात तक लगातार बारिश हुई थी.