ट्रेनों की टाइमिंग गड़बड़ : हमारा जोन सबसे पीछे 18 में 17वें नंबर पर
रायपुर। एक रेल यूजर की ओर से मांगे गए आरटीआई के जवाब में रेलवे बोर्ड के कोचिंग निदेशालय ने देश के सभी 18 रेलवे जोन की पिछले 10 वर्षों की पंक्चुअलिटी का उपलब्ध आंकड़ा कराया है। इसमें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की समयबद्धता में लगातार गिरावट दिखाई देती है। बता दें कि एसईसीआर की पंक्चुअलिटी 2020-21 में 95.94 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर थी, जबकि 2023-24 में घटकर 45.44 प्रतिशत रह गई। 2026-27 में अगस्त तक यह 54.38 प्रतिशत है। आरटीआई आंकड़ों के मुताबिक, देश के 18 रेलवे जोन में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे 17वें स्थान है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में पिछले कुछ वर्षों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में एसईसीआर ने 95.94 प्रतिशत पंक्चुअलिटी के साथ इस अवधि का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद पंक्चुअलिटी में गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, 2017-18 में एसईसी आर की पंक्चुअलिटी 80.06 प्रतिशत थी। 2018-19 में यह घटकर 54.91 प्रतिशत रह गई। इसके बाद 2019-20 में सुधार हुआ और पंक्चुअलिटी 76.11 प्रतिशत पहुंच गई।
पंक्चुअलिटी कम होने के कारण ट्रेन पकड़ने के लिए समय से स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को अब अक्सर अपनी ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है। कहीं ट्रेन घंटों देर से पहुंच रही है तो कहीं देरी के कारण यात्रियों की आगे की कनेक्टिंग ट्रेन छूट जा रही है। रेलवे बोर्ड स्तर पर ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने के लिए लगातार समीक्षा और निर्देश दिए जाने के बावजूद दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ट्रेनों की पंक्चुअलिटी लगातार नीचे जा रही है।
आरटीआई से मिले आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026-27 में अगस्त तक रेलवे जोन की पंक्चुअलिटी में काफी अंतर है। उत्तर-पश्चिमी रेलवे 94.80 प्रतिशत और पश्चिम रेलवे 94.10 प्रतिशत पंक्चुअलिटी के साथ ऊंचे स्तर पर हैं। दक्षिण रेलवे की पंक्चुअलिटी मी 90.42 प्रतिशत रही। वहीं ईस्ट-कोस्ट रेलवे 4340 प्रतिशत के साथ सबसे निचली पायदान पर है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पंक्चुअलिटी 54.38 प्रतिशत और दक्षिण पूर्व रेलवे की 54.18 प्रतिशत रही। इससे अलग-अलग जोन में ट्रेनों की समयबद्धता के बीच बड़ा अंतर सामने आता है।
पंक्चुअलिटी घटने का कारण यह भी है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का रेल रूट बीते पांच वर्षों में काफी व्यस्त हो चुका है। रायपुर मंडल में 100 यात्री ट्रेनों की क्षमता है, लेकिन प्रतिदिन यहां 140 यात्री ट्रेनें दौड़ रही है। खास बात ये है कि यात्री ट्रेनों की तुलना में मालगाडियों की संख्या अधिक है। जोन में 250 से अधिक मालगाड़ियां चल रही है। मालगाड़ियों की संख्या बढ़ने और पटरियों पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण जोन के मंडलों में कोई मी ट्रेन समय पर नहीं पहुंच पा रही है। बता दें कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से कोयले की मारी माल ढुलाई होती है। पटरियों पर अधिक ट्रैफिक और मेंटेनेस ब्लॉक के कारण यात्री ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ता है। इससे ट्रेनों के समय पर चलने की व्यवस्था प्रभावित होती है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सीपीआरओ शेख शमी उर रहमान ने बताया कि, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ट्रेनों की समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार मॉनिटरिंग और नियमित समीक्षा की जा रही है। विलंब के कारणों की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना के काम तेजी से किए जा रहे है, जिससे आने वाले समय में ट्रेनों के परिचालन की दक्षता और समयबद्धता में और सुधार होगा।
