ट्रंप का दावा- खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकाने तबाह, क्यों कहा जाता है इसे ईरान की लाइफ़लाइन?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, “कुछ ही देर पहले मेरे आदेश पर अमेरिकी सेंट्रल कमान ने मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली हवाई हमलों में से एक को अंज़ाम दिया और खार्ग द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. खार्ग द्वीप को ईरान की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक माना जाता है.”
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह मैसेज पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा कि फिलहाल “मानवीय और नैतिक कारणों से मैंने इस द्वीप के तेल ढांचे को निशाना नहीं बनाने का फ़ैसला किया है.” अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पूरे मध्य पूर्व में तेल रिफ़ाइनरियां और तेल भंडार टैंक हमलों का निशाना बन गए हैं.
इसराइली सेना अब तक तेहरान में रेय, शहरान और अकदसियेह के तेल डिपो और करज शहर के फरदिस क्षेत्र पर हमला कर चुकी है. इसराइली सेना का कहना है कि इन हमलों का लक्ष्य वे ईंधन टैंक थे जिन्हें ईरानी सरकार “सैन्य डिपो बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही थी.”
इस बीच, ईरान भी जवाबी कार्रवाई में पीछे नहीं रहा है और उसने फारस की खाड़ी के कई देशों में रिफ़ाइनरियों और तेल डिपो पर हमले किए हैं. अब खार्ग द्वीप पर हमले के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा कर सकता है. खार्ग द्वीप ईरान के सबसे बड़े तेल भंडार का केंद्र है और ईरान के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी छोटे द्वीप से होता है.
बीते साल जून में हुए 12 दिन के युद्ध से पहले भी खार्ग द्वीप का नाम इसराइल के संभावित लक्ष्यों में लिया गया था. इस बार खार्ग द्वीप पर ध्यान तब और बढ़ गया जब इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री और देश के प्रमुख विपक्षी नेता यायर लैपिड ने तेहरान और करज के तेल डिपो पर हमले के एक दिन बाद सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “इसराइल को खार्ग द्वीप पर मौजूद ईरान के सभी तेल क्षेत्रों और एनर्जी इंडस्ट्री को नष्ट कर देना चाहिए. यह ऐसा कदम होगा जो ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा और सरकार को गिरा देगा.”
इसराइल द्वारा ईरानी तेल डिपो पर हमलों के जवाब में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इसराइल से “अपने लक्ष्यों का सावधानी से चुनाव करने” का आग्रह किया.
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “हमारा लक्ष्य ईरानी जनता को आज़ाद कराना है, इस तरह कि इस शासन के पतन के बाद उन्हें एक नया और बेहतर जीवन शुरू करने का अवसर मिले. इस लक्ष्य को हासिल करने में ईरान की तेल अर्थव्यवस्था अहम होगी.”
