उद्धव ठाकरे बोले- दिशा सालियान केस से हमारा लेना-देना नहीं, परिवार को बेवजह बदनाम किया जा रहा
शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को कहा कि दिशा सालियान केस को लेकर उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा- इस मामले से हमारा दूर-दूर तक संबंध नहीं है। ठाकरे ने छत्रपति संभाजीनगर में कहा- मेरा भी नाम है। आपका भी नाम आएगा। मोदी और ट्रम्प का भी नाम आ सकता है। आखिर नाम क्यों लिया जा रहा है? यह राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। कब तक सहन करते रहेंगे?
उन्होंने कहा- बेवजह चरित्रहनन बहुत हो गया और अगर ये जारी रहा तो मैं बिना किसी से सलाह लिए कानूनी कार्रवाई पर मजबूर हो जाऊंगा। उद्धव ने कहा कि इस मामले में लगातार नाम घसीटे जा रहे हैं। हम इतने समय तक चुप रहे, क्योंकि सरकार ने खुद इसकी जांच के लिए SIT बनाई थी। हमने उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से जांच करने देने के लिए चुप्पी साधे रखी।
उन्होंने कहा- हमने तय किया था कि जांच पूरी होने तक कुछ नहीं बोलेंगे। ठाकरे ने गुस्से में चेतावनी दी कि हमारा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उस युवा महिला की जान चली गई।
ठाकरे ने कहा- मैं उन्हें नहीं जानता था। मैं उनसे कभी नहीं मिला। मेरा उनसे या जो कुछ हुआ, उससे कोई संबंध नहीं है। फिर भी मेरा नाम इसमें घसीटा जा रहा है।
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिशा के पिता सतीश सालियान ने कहा था कि दिशा का गैंगरेप और हत्या हुई। मामले को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR की मांग की थी।
उन्होंने यह भी कहा था- मैं 6 साल से इसका इंतजार कर रहा था। खुश होने की कोई वजह नहीं है। मैंने अपनी बेटी को खोया है। आज मुझे राहत महसूस हो रही है। मैंने हाथ जोड़कर जज के प्रति आभार जताया।
सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने कहा था कि जिन लोगों के खिलाफ जांच में सबूत मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ सबूत नहीं मिलता है तो उसे आरोपी नहीं बनाया जाएगा। अगर CBI की रिपोर्ट नकारात्मक आती है, तो परिवार को उस पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा।
ओझा के मुताबिक, FIR में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, परमबीर सिंह, उद्धव ठाकरे, सचिन वाजे और पिछली SIT के उन सदस्यों के नाम भी आरोपी के तौर पर दिए गए हैं, जिन पर मामले को दबाने का आरोप है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर की सुनवाई के दौरान छह साल तक FIR दर्ज न करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाई और कहा था कि पुलिस की जांच से जवाबों से ज़्यादा सवाल खड़े होते हैं।
दिशा केस की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी। अक्टूबर 2020 में पुलिस ने मौत को सुसाइड बताया था। वहीं दिसंबर 2023 में केस दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। इसमें भी आत्महत्या की बात कही गई थी।
