जुबान बिगड़ी हुई थी उदयनिधि की, पहली बार मिला सवा शेर… CM विजय ने घर से उठवा लिया
तमिलनाडु की राजनीति में हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां कोई नई बात नहीं. 1996 में जयललिता को कलर टीवी घोटाले में गिरफ्तार किया गया. 2001 में जयललिता सरकार ने करुणानिधि को आधी रात को फ्लाईओवर घोटाले के आरोप में घर से उठा लिया था. अब 2026 में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को कावेरी रैली के दौरान तृषा पर कथित डबल मीनिंग टिप्पणी के मामले में अरेस्ट किया गया है.
दरअसल जब तमिलनाडु में डीएमके की सरकार थी तो उदयनिधि स्टालिन कुछ भी बोलकर निकल जाते थे. कभी सनातन को डेंगू-मलेरिया कहा और इसका खात्मा करने की बात की, तो कभी हिन्दी भाषा को लेकर विवादित बयान दिया. अपनी सरकारी मशीनरी और कानूनी पेचिदगियों का इस्तेमाल कर वे हर बार निकल जाते थे. लेकिन इस बार मामला उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ निजी टिप्पणी का था.
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की जुबान एक बार फिर बिगड़ी और इस बार नतीजा पहले से कहीं ज्यादा कठोर निकला. चेन्नई स्थित उनके घर से पुलिस ने उन्हें उठा लिया. पूर्व सीएम के बेटे उदयनिधि को पहली बार ‘सवा शेर’ मिला. सीएम विजय ने इस पर तत्काल कार्रवाई की और 24 घंटे से कम समय में भी एक्शन लिया. उन्होंने साफ संदेश दे दिया कि बड़बोले बयानों का जवाब अब सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है.
जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची तो वे टायलेट में थे. उदयनिधि की पत्नी ने पुलिस से कहा, “वे टायलेट में हैं, कृपया कुछ समय दीजिए.” हालांकि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर ही लिया.
उदयनिधि स्टालिन लंबे समय से विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं. सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया की तरह बताकर उन्मूलन की बात कहने वाले बयान से लेकर विधानसभा में व्यक्तिगत कटाक्ष तक, उनकी जुबान अक्सर विवादों का केंद्र बनी. लेकिन इस बार मामला पर्सनल था.
राष्ट्रीय महिला आयोग को दिए शिकायत में TVK ने कहा कि यह विवादित टिप्पणी सोमवार को तंजावुर में पनागल बिल्डिंग के पास उदयनिधि के नेतृत्व में हुए DMK के प्रदर्शन के दौरान की गई थी.
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि जब कावेरी मुद्दे पर उदयनिधि के भाषण के दौरान भीड़ “तृषा, तृषा” के नारे लगा रही थी, तो उन्होंने एक अश्लील और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की.
शिकायतकर्ता ने उन पर और DMK IT विंग के अधिकारियों पर जानबूझकर महिलाओं का अपमान करने, अभिनेत्री और आम तौर पर महिलाओं को मानसिक पीड़ा पहुंचाने और सार्वजनिक अशांति फैलाने के मकसद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना का 2 मिनट 39 सेकंड का वीडियो जानबूझकर फैलाने का आरोप लगाया है.
तृषा मुख्यमंत्री विजय की पुरानी सह-कलाकार और सोशल मीडिया चर्चाओं में अक्सर उनके करीब बताई जाने वाली हस्ती हैं. इस टिप्पणी का वीडियो वायरल होते ही टीवीके और भाजपा ने इसे घिनौनी हरकत करार दिया. शिकायतों के आधार पर तंजावुर पुलिस ने महिलाओं के उत्पीड़न और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की.
उसके बाद पुलिस टीम चेन्नई के नीलांकरई स्थित उदयनिधि के आवास पहुंची और उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
हिरासत में लिए जाने के बाद उदयनिधि का पहला बयान भी चर्चा में रहा. उन्होंने सवाल किया, “क्या मैंने कुछ गलत कहा?” यानी उन्होंने अपने बयान को आपत्तिजनक मानने से इनकार किया. हालांकि इस बीच मामला मद्रास हाईकोर्ट भी पहुंचा. यहां तमिलनाडु सरकार ने अदालत को बताया कि उदयनिधि को न्यायिक हिरासत में भेजने का इरादा नहीं है और पूछताछ के बाद उन्हें स्टेशन बेल पर छोड़ दिया जाएगा.
यह घटना सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है. विजय की सरकार ने साफ दिखाया कि विपक्ष के नेता होने के बावजूद कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत टिप्पणियों और अभद्र बयानों से ऊपर नहीं है.
यह टकराव अचानक नहीं आया है. चुनाव हारने के बाद उदयनिधि विपक्ष के नेता बने. विधानसभा में उन्होंने मुख्यमंत्री विजय पर कई बार निशाना साधा. एक बार उन्होंने चेंगलपट्टू कोर्ट में पत्नी द्वारा पति को ढूंढने की कहानी का जिक्र किया, जिसे विजय की पत्नी संगीता सोरनलिंगम की तलाक याचिका से जोड़ा गया. विजय ने भी जवाबी कटाक्ष किए. लेकिन तृषा वाली टिप्पणी ने रेखा पार कर दी.
इस बार समीकरण अलग हैं. पहले डीएमके सत्ता में थी और उदयनिधि के पिता ही सीएम थे. अब तमिलनाडु में विजय मुख्यमंत्री हैं और उदयनिधि विपक्ष के नेता की भूमिका में हैं. ऐसे में राजनीतिक शक्ति संतुलन बदल चुका है. यही वजह है कि जिस तरह की बयानबाज़ी पहले केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहती थी, उस पर अब कानूनी कार्रवाई भी देखने को मिली.
फिल्मी छवि वाले विजय ने टीवीके के जरिए नई राजनीति का मॉडल पेश किया. स्टालिन परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले उदयनिधि शायद इस बदलाव को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. बड़बोले बयान और व्यक्तिगत हमले उनकी शैली का हिस्सा रहे, लेकिन सत्ता पक्ष अब जवाब देने को तैयार है.
विजय ने उदयनिधि को गिरफ्तार करवाकर एक मजबूत संदेश दिया है कि नई सरकार कमजोर नहीं है. चाहे कावेरी का पानी हो, किसानों के मुद्दे हों या व्यक्तिगत गरिमा, जरूरत पड़ने पर सरकार कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं उठेगी.
