अनोखी चट्टान.. अजूबा बैलेंस…महज चंद इंच पर टिकी ये चट्टान, वैज्ञानिक भी हैरान

रोचक

जबलपुर : मदन महल में एक अनोखी चट्टान है. जो एक अजूबा से कम नहीं हैं. जिसे बैलेंस रॉक के नाम से जाना जाता है. इस चट्टान का वजन कई टन में है. लेकिन यह चट्टान महज चंद इंच में ही टिकी हुई है. खास बात यह है कि करीब पांच रिएक्टर के भूकंप के झटके भी इस चट्टान को हिला नहीं पाए. आज भी यह चट्टान उसी जगह में टिकी हुई है. वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझाने का प्रयास किया. लेकिन जवाब सिर्फ यही होता है, यह पत्थर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही टिका हुआ है. जबलपुर शहर में ग्रेनाइट चट्टानें फेमस है. इसी के रूप में यह चट्टान भी है. यह बैलेंस रॉक मदन महल के नजदीक स्थित है. लिहाजा इसे बैलेंस रॉक को देखने देश-विदेश से लोग आते हैं. बैलेंस रॉक देखने के बाद लोग 2 मिनट के लिए सहम भी जाते हैं और मन में आता हैं, आखिर ऐसे कैसे हो सकता है. हालांकि कुछ लोग नजदीक खड़े होने में भी घबराते हैं. कहीं अचानक ये भारी चट्टान गिर ना जाए दुनिया भर में अलग प्रकार का अजूबा है. इसका इतिहास शहर में ही देखने को मिलता है. जबलपुर के जबल शब्द फारसी शब्द हैं, जिसका अर्थ ही पत्थर होता है. जबलपुर शहर पहले पत्थर का शहर होता था. शहर में चारों तरफ पत्थर ही पत्थर होते थे. हालांकि यह भी कहा जाता है कि जबालि ऋषि ने जबलपुर में तपस्या की थी. इसीलिए शहर का नाम जबलपुर पड़ गया. उन्होंने कहा बैलेंस रॉक ग्रेनाइट फॉर्मेशन में हैं. जिसके चारों तरफ पहले मिट्टी हुआ करती थी. धीरे-धीरे कालांतर में रॉक के नजदीक से मिट्टी बह गई. बैलेंस रॉक को तोड़ने का भी प्रयास किया गया था, क्योंकि बैलेंस रॉक प्राइवेट लैंड पर था. जिसको लेकर फोटोग्राफर रजनीकांत ने विरोध भी किया था. लिहाजा स्वयं एडवोकेट जयंत वर्मा ने हाईकोर्ट में पिटीशन भी लगाई थी. जिसके बाद कोर्ट ने जमीन को पुरातत्व विभाग को सौंप दिया गया और बैलेंस रोग को संरक्षित किया गया.