कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, मां दुर्गा के किए दर्शन
कोलकाता की सड़कों पर सजे पंडाल, मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं और हर तरफ उत्सव का माहौल. दुर्गा पूजा के दौरान शहर की यही तस्वीर दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है.इस बार अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी कोलकाता पहुंचे और यहां के दुर्गा पूजा पंडालों का दौरा किया. उन्होंने मां दुर्गा के दर्शन किए, पंडालों की सजावट देखी और इस त्योहार से जुड़ी कला और लोगों के उत्साह को करीब से महसूस किया.
गोर ने अपने दौरे की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा कीं. उनके इस पोस्ट में कोलकाता की सांस्कृतिक पहचान और दुर्गा पूजा की भव्यता की झलक दिखाई दी. सर्जियो गोर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कोलकाता लौटकर उन्हें खुशी हुई. उन्होंने कई खूबसूरत पंडाल देखे और यहां की रचनात्मकता और लोगों के बीच एकजुटता को महसूस किया.
साझा की गई तस्वीरों में गोर मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने खड़े नजर आए. दूसरी तस्वीरों में वह पंडालों की सजावट और बारीक कलाकारी देखते नजर आए. कोलकाता में हर साल पंडालों को अलग-अलग थीम पर सजाया जाता है. कलाकार अपनी कल्पना और मेहनत से इन्हें खास रूप देते हैं. यही वजह है कि यहां के पंडाल श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं.
गोर ने अपने पोस्ट में लिखा,“कोलकाता लौटकर अच्छा लगा! कुछ खूबसूरत पंडाल देखे और यहां की शानदार रचनात्मकता, सामुदायिक भावना और गर्मजोशी को करीब से महसूस किया. अब समझ सकता हूं कि यह उत्सव इतना खास क्यों है.” उन्होंने दुर्गा पूजा मना रहे सभी लोगों को शुभकामनाएं भी दीं.
Great to be back in Kolkata! Visited some beautiful pandals and experienced firsthand the incredible creativity, community spirit, and warmth. I can see why this celebration is so special. Happy Durga Puja to everyone celebrating! https://t.co/PsX4imUqhD
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) October 12, 2026
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा सबसे बड़े त्योहारों में से एक है. इस दौरान कोलकाता की गलियां और सड़कें रोशनी से जगमगा उठती हैं. पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.
यह त्योहार केवल पूजा तक सीमित नहीं है. इसमें कला, संस्कृति और सामूहिक भागीदारी भी अहम भूमिका निभाती है. पंडाल बनाने वाले कलाकारों से लेकर आयोजन में जुटे स्थानीय लोगों तक, हजारों लोग इसकी तैयारियों में हिस्सा लेते हैं.
