अमेरिका-ईरान में 2 हफ्ते का सीजफायर, 40वें दिन जंग रुकी

अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिन से जारी जंग के बाद आखिरकार 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ की अपील के बाद लिया गया। सीजफायर से पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो वह उसकी पूरी सभ्यता खत्म कर देंगे। उन्होंने अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की भी धमकी दी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील पाकिस्तान की मध्यस्थता और आखिरी समय में चीन के दखल के बाद संभव हो पाई। पाकिस्तान ने 2 हफ्ते के सीजफायर का प्रस्ताव रखा था, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया। समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल अपने हमले रोकेंगे। ईरान भी हमले बंद करेगा। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल, गैस और अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना की मदद से सुनिश्चित की जाएगी।

इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच 10 अप्रैल को औपचारिक बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी। ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने अमेरिका को 10 पॉइंट का प्लान भेजा है। उन्होंने कहा कि इस पर आगे बातचीत की जा सकती है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसका 10 पॉइंट प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। काउंसिल के मुताबिक यह समझौता ईरान की शर्तों पर हुआ है और इसे देश की जीत बताया है।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के बाद इजराइल में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी नेता यायर लैपिड ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर बड़ा हमला बोला है। लैपिड ने कहा कि यह इजराइल के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक आपदा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम फैसलों में इजराइल को शामिल ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सेना ने अपना काम पूरी तरह किया और जनता ने भी मजबूती दिखाई, लेकिन नेतन्याहू राजनीतिक और रणनीतिक दोनों स्तर पर विफल रहे।

लैपिड ने यह भी कहा कि नेतन्याहू अपने किसी भी तय लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए और उनके फैसलों से हुए नुकसान की भरपाई करने में देश को कई साल लगेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति नेतन्याहू के अहंकार, लापरवाही और रणनीतिक योजना की कमी का नतीजा है।