अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे, फ्रांस ने 15, जर्मनी ने 13 और ब्रिटेन ने 1 भेजा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के बाद यूरोपीय देश एकजुट हो गए हैं। कई NATO सदस्य देशों ने ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस नाम से एक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है। इसके लिए यूरोपीय देशों में फ्रांस ने 15 सैनिक ग्रीनलैंड भेजे हैं, जो 27वीं माउंटेन इन्फैंट्री ब्रिगेड से हैं। जर्मनी ने 13 सैनिकों की एक टीम भेजी है। नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड ने दो-दो सैनिक तैनात किए हैं। ब्रिटेन ने एक सैन्य अधिकारी भेजा है। स्वीडन ने भी सैनिक भेजने की पुष्टि की है, हालांकि संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है। कुल मिलाकर, डेनमार्क के मौजूदा सैनिकों के अलावा यूरोपीय देशों से लगभग 35-40 सैन्य कर्मी पहुंचे हैं। वहीं, इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने इस पूरे ऑपरेशन को मजाक जैसा बताया।

डेनमार्क पहले से ग्रीनलैंड में करीब 200 सैनिक तैनात किए हुए है। इसके अलावा 14 सदस्यीय सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल भी वहां मौजूद है, जो आर्कटिक इलाकों में गश्त करता है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि आने वाले दिनों में इन्हें जमीन, हवा और समुद्र के जरिए और मजबूत किया जाएगा। यह संख्या छोटी है, लेकिन यह राजनीतिक संदेश देने के लिए है कि NATO एकजुट है। डेनमार्क के नेतृत्व में चल रहा ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस एक सैन्य अभ्यास है। इसका मकसद ग्रीनलैंड में भविष्य में बड़े सैन्य तैनाती की संभावना को परखना है। डेनिश रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह आर्कटिक इलाकों में सहयोगी देशों की संचालन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।

भविष्य में ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री नाम से एक बड़ा NATO मिशन प्रस्तावित है, जिसका मकसद ग्रीनलैंड के आसपास निगरानी और सैन्य प्रतिरोध बढ़ाना है। हालांकि जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के मुताबिक यह मिशन शुरू होने में अभी महीनों लग सकते हैं। NATO के कुछ बड़े सैन्य ताकत वाले देश इस मिशन से दूर रहे। पोलैंड, इटली और तुर्किए ने ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने से इनकार कर दिया। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने साफ कहा कि उनका देश सैनिक नहीं भेजेगा। दूसरी ओर यूरोपीय यूनियन ट्रम्प के टैरिफ का जवाब देने के लिए अमेरिका पर ट्रेड पाबंदियां लगाने की तैयारी में है। EU ‘ट्रेड बाजूका’ के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है, जो यूरोपीय देशों पर जबरदस्ती आर्थिक दबाव बनाने पर काउंटर कार्रवाई करता है।

इसके जरिए EU अमेरिका के सामानों पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है, अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय मार्केट तक पहुंच से रोक सकता है या सरकारी ठेकों में अमेरिकी कंपनियों को भाग लेने से रोक सकता है।

यूरोपीय संघ (EU) के सांसद अमेरिका के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट की मंजूरी रोकने की तैयारी में हैं। यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (EPP) के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने शनिवार को सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर कहा कि ट्रम्प की ग्रीनलैंड धमकियों के कारण अमेरिका से समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है। मैनफ्रेड वेबर ने सोशल मीडिया पर कहा कि EPP व्यापार समझौते के पक्ष में था, लेकिन ट्रम्प की ग्रीनलैंड धमकियों के कारण अब मंजूरी संभव नहीं। उन्होंने अमेरिकी उत्पादों पर 0% टैरिफ को होल्ड करने की बात कही।

यूरोपीय संसद के अन्य समूह भी समझौते को फ्रीज करने की मांग कर रहे हैं। अगर फैसले को लेकर सहमति बनती है, तो समझौता रुक सकता है।

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