5000 साल पहले ममी बनाने में होता था इस्तेमाल, अब इसके लिए छिड़ जाती है जंग

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बाद दुनिया भर में तेल-गैस को लेकर चिंताएं बढ़ गई है. कई देशों में तो तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. तेल यानी पेट्रोलियम आज की दुनिया की सबसे जरूरी प्राकृतिक संपत्तियों में से एक है, लेकिन इसकी कहानी करोड़ों साल पुरानी है. क्या आपने कभी यह सोचा है कि जमीन की गहराई में मिलने वाला यह गाढ़ा, काला तरल पदार्थ आता कहां से है? यह कोई जादू नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की अथक मेहनत का परिणाम है. आइए, तेल के बनने से लेकर पेट्रोल-डीजल के रूप में आपकी गाड़ी तक पहुंचने की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं. कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल एक काले रंग का गाढ़ा और चिपचिपा लिक्विड होता है, जिसे पेट्रोलियम भी कहा जाता है. यह हाइड्रोकार्बन का मिश्रण होता है और इसे जीवाश्म ईंधन भी कहा जाता है. कच्चा तेल लाखों साल पहले समुद्र में रहने वाले छोटे-छोटे जीवों और पौधों के अवशेषों से बना है. जब ये जीव मर गए, तो उनके अवशेष रेत, गाद और चट्टानों की परतों के नीचे दब गए. समय के साथ ज्यादा गर्मी और दबाव के कारण ये अवशेष धीरे-धीरे गाढ़ा और चिपचिपा तरल में बदल गया, जिसे हम अब कच्चा तेल या पेट्रोलियम कहते हैं.

अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि तेल का इस्तेमाल कब से यानी कितने सालों से हो रहा है. तो इसका जवाब है लगभग 5000 साल पहले से. प्राचीन बेबीलोन और मिस्र सभ्यता में इसके इस्तेमाल के सबूत मिले हैं, लेकिन उस समय इसका इस्तेमाल ईंधन के रूप में नहीं बल्कि खास कामों के लिए किया जाता है. उस समय ममी के ताबूतों पर कोटिंग करने के लिए एक काले, चिपचिपे पदार्थ का इस्तेमाल होता था. जांच में पता चला कि यह पदार्थ वनस्पति तेल, जानवरों की चर्बी, पेड़ की राल, मधुमक्खी का मोम और बिटुमेन (ठोस कच्चा तेल) मिलाकर तैयार किया जाता था.

तेल भले ही कच्चा तेल हजारों सालों से मौजूद था, लेकिन आधुनिन समय में इसकी जानकारी लोगों को नहीं थी. आधुनिक दौर में इसकी असली खोज 19वीं शताब्दी में हुई. दुनिया में पहली बार 27 अगस्त 1859 को अमेरिका में कच्चे तेल का स्रोत मिला. जॉर्ज बिसेल और एडविन एल. ड्रेक ने पेंसिल्वेनिया के टाइटसविले इलाके में एक खास ड्रिलिंग मशीन की सहायता से जमीन से लगभग 70 फीट तक खुदाई की. इसी दौरान उन्हें जमीन के नीचे तेल का कुआं मिला. यही घटना आधुनिक तेल उद्योग की शुरुआत मानी जाती है क्योंकि यहीं से पहली बार व्यवस्थित तरीके से तेल की खोज और प्रोडक्शन शुरू हुआ था.

तेल की खोज के बाद टाइटसविले में अमेरिका का पहला व्यावसायिक तेल कुआं खोदा गया. यहां तेल निकलाने के लिए एक नई टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता था, जिसमें पाइपलाइन के जरिए बोर होल किया जाता, जिससे ज्यादा गहराई तक ड्रिलिंग की जा सके. तेल के कुएं की सफलता और केरोसिन की बढ़ती मांग ने क्रूड ऑयल की खोज को और तेज कर दिया इसकी वजह से कई सारी नई इंडस्ट्री भी खड़ी हुईं.

जमीन के अन्दर से जो तेल निकलता है वह कच्चा तेल यानी ‘क्रूड ऑयल’ होता है. इसे आप सीधे अपनी गाड़ी में नहीं डाल सकते. इसे इस्तेमाल में लाने के लिए पेट्रोलियम रिफाइनरी में भेजा जाता है. रिफाइनिंग की सबसे बड़ी प्रक्रिया को फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहते हैं. इसका सिद्धांत सरल है जिसमें कच्चे तेल में मौजूद अलग-अलग पदार्थों को अलग-अलग तापमान पर उबालते हैं.