वेनेजुएला-ईरान के बाद क्यूबा पर हमला कर सकता है अमेरिका, ट्रम्प बोले- क्यूबा को हासिल करके रहूंगा

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह ‘क्यूबा को अपने कब्जे में लेने’ का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा… चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।” न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के इस बयान को काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपति क्यूबा के साथ तनावपूर्ण रिश्तों में रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इस तरह खुलेतौर पर क्यूबा पर कब्जा करने की बात नहीं कही थी। इस साल ट्रम्प पहले ही वेनेजुएला और ईरान में सैन्य कार्रवाई कर चुके हैं। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ मजाक या अचानक कही गई बात नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक संभावित अगला कदम समझा जा रहा है। अमेरिका और क्यूबा के संबंध 65 साल से खराब चल रहे हैं।

ट्रम्प ने इससे पहले रविवार को एयर फोर्स वन में भी कहा था, “मैं क्यूबा को संभाल रहा हूं… जल्द ही हम कोई डील करेंगे या जो करना होगा करेंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी प्राथमिकता पहले ईरान है, उसके बाद क्यूबा। असल में, अमेरिका पहले से ही क्यूबा पर दबाव बना रहा है। जनवरी से अमेरिका ने क्यूबा को हो रही तेल सप्लाई को लगभग रोक दिया है। दूसरे देशों को भी चेतावनी दी जा रही है कि वे क्यूबा को तेल न दें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को भी रोक लिया।

इसका असर क्यूबा में साफ दिख रहा है। 9 जनवरी के बाद से वहां कोई बड़ी तेल सप्लाई नहीं पहुंची है। वहां हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। क्यूबा के ब्लैक मार्केट में पेट्रोल करीब 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गया है रोजाना बिजली कट रही है, सोमवार को पूरे देश में ब्लैकआउट हुआ। अस्पतालों में सर्जरी टल रही हैं। दवाइयों की कमी हो रही है और खाने की समस्या बढ़ रही है। इन हालात में क्यूबा की सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने हाल ही में देश को संबोधित करते हुए माना कि अमेरिका से बातचीत चल रही है और जल्द ही अर्थव्यवस्था खोलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। साथ ही खबर यह भी है कि अमेरिका चाहता है कि क्यूबा के राष्ट्रपति पद से डियाज-कैनेल हटें। हालांकि, अमेरिका फिलहाल कास्त्रो परिवार के खिलाफ सीधी कार्रवाई की बात नहीं कर रहा है। यह रणनीति वैसी ही है जैसी वेनेजुएला में अपनाई गई थी। यानी ट्रम्प क्यूबा में सरकार बदलने के बजाय उसे अपने हिसाब से चलने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। इस बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर क्यूबा का समर्थन कर सकता है। दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।

क्यूबा में आर्थिक सुधार की भी शुरुआत दिख रही है। वहां के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ऐलान किया है कि विदेश में रहने वाले क्यूबाई लोग अब देश में निवेश कर सकेंगे, बैंकिंग कर सकेंगे और कारोबार कर सकेंगे। यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, हालात इतने खराब हैं कि इस घोषणा को टीवी पर नहीं बल्कि रेडियो पर करना पड़ा, क्योंकि बिजली नहीं थी। मंगलवार सुबह तक राजधानी हवाना के करीब 70 प्रतिशत हिस्से में बिजली नहीं थी।

ट्रम्प के बयान से यह भी साफ होता है कि वह क्यूबा को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कारोबारी नजरिए से भी देख रहे हैं। वह पहले से ही इस द्वीप में निवेश की संभावना देखते रहे हैं। 1998 में उनकी कंपनी ने चुपचाप क्यूबा का दौरा कराया था। 2011-12 में भी उनके संगठन के लोग वहां गोल्फ कोर्स बनाने की संभावनाएं देख चुके हैं।

2016 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रम्प ने कहा था कि क्यूबा निवेश के लिए अच्छा मौका हो सकता है। अब उन्होंने फिर कहा, “वे हमसे बात कर रहे हैं। यह एक असफल देश है। उनके पास न पैसा है, न तेल, कुछ भी नहीं है।”

इसके साथ ही उन्होंने क्यूबा की जमीन और मौसम की तारीफ भी की और इसे एक सुंदर द्वीप बताया। लेकिन उनके बयान से यह भी दिखा कि उन्हें भौगोलिक जानकारी पूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा तूफानों (हरिकेन) के क्षेत्र में नहीं आता, जबकि हकीकत में क्यूबा अक्सर हरिकेन से प्रभावित होता है।

अंत में ट्रम्प ने ऐसे संकेत दिए जैसे क्यूबा पहले से ही अमेरिका की संपत्ति हो। उन्होंने कहा, “उन्हें हर हफ्ते तूफान के लिए हमसे पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे।”