युद्ध वहां, बर्बादी यहां! पश्चिम एशिया की जंग ने ओडिशा के प्लास्टिक उद्योग की तोड़ी कमर, कारखानों में सन्नाटा
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे माल की कीमतों में 75% उछाल आने से बालासोर का प्लास्टिक हब ठप हो गया है, जिससे हजारों मजदूर बेरोजगार हो रहे हैं ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से करीब 205 किलोमीटर दूर बालासोर में गणेश्वरपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाले कारखाने में ठेके पर काम करने वाले को इन दिनों बेरोजगारी जैसी हालात से जूझना पड़ रहा है। कहा, ‘महज एक महीना पहले हमारे पास थोड़ा भी आराम करने का समय नहीं था। मगर अब मशीनें काफी समय तक बंद रहती हैं। फैक्टरी सुपरवाइजर बताते हैं कि कच्चा माल न होने के कारण काम नहीं है। हमें स्थिति में सुधार होने तक इंतजार करने के लिए कहा गया है। अब लगभग 15 दिन हो चुके हैं और मैं बेरोजगार हूं।’
करीब 70 एकड़ क्षेत्र में फैला गनेश्वरपुर औद्योगिक क्षेत्र तटीय जिले के सात प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और विकास केंद्रों में शामिल है। यहां प्लास्टिक, पॉलिमर और इससे संबद्ध क्लस्टर में लगभग 20 एमएसएमई इकाइयां परिचालन में हैं। इन इकाइयों में पॉलिप्रोपिलीन आधारित घरेलू उत्पादों, बैग, पाइप और फिटिंग्स के सामानों का उत्पादन होता है।
हजारों मील दूर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट के अवरुद्ध होने का प्रभाव इस औद्योगिक पट्टी के कारखानों में सन्नाटों के रूप में दिखने लगा है। भले ही यहां के मजदूरों ने कभी कच्चे तेल का बैरल तक न देखा हो लेकिन इसकी वजह से उन्हें रोजगार का नुसान हो रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या सामान्य दिनों में 1,500 से अधिक होती थी जो अब घटकर 800 से भी कम रह गई है।
रतन जैसे श्रमिकों को रोजाना अथवा पाली के आधार पर भुगतान किया जाता है। उनके लिए पश्चिम एशिया संकट का मतलब तत्काल मजदूरी का नुकसान है। अपने कारखाने के समीप एक चाय की दुकान पर बैठे रवींद्र साहू ने कहा, ‘अगर मैं काम नहीं करूंगा तो मेरी कमाई भी नहीं होगी। मगर पारिवारिक खर्च तो करने ही पड़ेंगे। ऐसा कब तक चलेगा? अगर यही स्थिति एक सप्ताह और रही तो मेरे बच्चे भूखे मर जाएंगे।’
औद्योगिक क्लस्टर के मध्य में स्थित प्लास्टिक हाउसवेयर विनिर्माण इकाई जगदम्बा पॉलिमर्स लिमिटेड के भीतर संकट का प्रभाव स्पष्ट तौर पर दिख रहा है। वहां की इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनें एक-एक करके बंद हो रही हैं। वहां की बाल्टियां, मग आदि सामान्य तौर पर ताजा उत्पादों से भरे होते थे लेकिन फिलहाल वे खाली नजर आ रहे हैं। बाथ सेट, कैसरोल, बच्चों के उत्पाद आदि के आधे-अधूरे तैयार माल बंद पड़े कन्वेयर बेल्ट के पास बिखरे पड़े हैं। उत्पादन की रफ्तार बेहद सुस्त पड़ चुकी है।
जगदम्बा ओडिशा में एक बड़े इंजेक्शन मोल्डिंग कारखाने का संचालन करती है जो पूर्वी भारत में सबसे बड़ा है। कंपनी अपने उत्पादों के लिए शीर्ष ब्रांडों में शुमार है और 12 से अधिक राज्यों में उसकी मौजूदगी है। उसके कारखाने में 1 लाख वर्ग फुट से अधिक जगह है। वहां एक उत्पादन लाइन पर जग (जूस के लिए) पर स्टिकर लगाते हुए एक मजदूर राजेंद्र मंडल ने कहा, ‘युद्ध वहां हो रहा है लेकिन उससे यहां हम लोगों को नुकसान हो रहा है। पहले सभी मशीनें उत्पादन करती थीं। मगर अब स्थिति बिल्कुल बदल गई है। हमें कच्चे माल की कमी के कारण मशीनें बंद होने से नौकरी जाने की चिंता सता रही है।’
कारखाना प्रबंधकों ने स्वीकार किया कि उत्पादन धीमा होने का असर सबसे पहले ठेका मजदूरों पर पड़ता है। उत्पादन प्रभारी कार्तिक चंद्र कर ने कहा, ‘उत्पादन में लगभग 70 फीसदी की कमी आई है। एक छत के तले 10 उत्पादन लाइनों में से केवल 2 ही चालू हैं। हम मांग के अनुसार मशीनों को नए सिरे से संचालित कर रहे हैं क्योंकि हम कच्चे माल की लागत काफी अधिक होने पर उत्पादों का ढेर नहीं लगा सकते। आय के तत्काल नुकसान से भी अधिक खतरनाक है अनिश्चितता की स्थिति।’
भारत के पास पेट्रोरसायन की घरेलू उत्पादन क्षमता काफी है लेकिन पॉलिमर की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता काफी अधिक है। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बाधित होने पर घरेलू विनिर्माताओं को मूल्य के झटके और आपूर्ति में कमी यानी दोहरी मार का सामना करना पड़ता है।
जगदम्बा पॉलिमर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने कहा कि भारतीय प्लास्टिक प्रॉसेसिंग उद्योग वैश्विक कच्चे तेल के परिवहन के प्रति काफी संवेदनशील है। उन्होंने कहा, ‘पॉलिमर नैफ्था एवं अन्य कच्चे तेल उत्पाद से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं। इसलिए भू-राजनीतिक अस्थिरता की सूरत में इनकी कीमतें बढ़ जाती हैं। पॉलिमर और पीईटी रेजिन की कीमतों में 75 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इतनी कम अवधि में हुई बेतहाशा वृद्धि वासतव में अभूतपूर्व है। ऐसे में हमारे पास उत्पादन को कम करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।’
