ये है दुनिया का सबसे आलसी जानवर, हफ्ते में एक बार ही करता है पॉटी

दुनिया भर में आलस्य की मिसाल दी जाए तो सबसे पहले स्लॉथ (Sloth) का नाम लिया जाता है. दक्षिण और मध्य अमेरिका के वर्षावनों में पाया जाने वाला यह अनोखा जानवर इतना आलसी है कि उसकी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा पेड़ की डाल पर लटके रहने में बीतता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि स्लॉथ प्रकृति का सबसे धीमा जानवर है, जिसकी गति इतनी कम होती है कि इंसान आसानी से इसे पकड़ सकता है. लेकिन इसके आलस्य के पीछे एक गहरा वैज्ञानिक कारण छिपा है.
स्लॉथ की सबसे चर्चित आदत है उसका पॉटी करना. सामान्य जानवर रोजाना कई बार शौच करते हैं, लेकिन स्लॉथ हफ्ते में सिर्फ एक बार नीचे उतरकर पॉटी करता है. यह प्रक्रिया उसके लिए इतनी मेहनत भरी होती है कि वह पेड़ से नीचे आता है, पॉटी करता है और फिर तुरंत वापस चढ़ जाता है. दिलचस्प बात यह है कि पॉटी करने के दौरान वह अपनी बॉडी का लगभग एक तिहाई वजन खो देता है. इतना भारी मल त्याग करना उसके लिए खतरनाक भी हो सकता है क्योंकि जंगल में शेर, जगुआर जैसे शिकारी उसे आसानी से पकड़ सकते हैं.

स्लॉथ का मेटाबोलिक रेट बेहद धीमा होता है. मनुष्यों की तुलना में इसकी मेटाबॉलिज्म 40-74% तक कम होती है. यही वजह है कि यह कम खाता है और जो खाता है उसे पचाने में भी बहुत समय लगता है. इसके बालों पर शैवाल (Algae) उग आते हैं जो हरे रंग के होते हैं, जिससे यह पेड़ों में घुल-मिल जाता है और शिकारियों से बच जाता है. स्लॉथ दो प्रकार के होते हैं- दो अंगुली वाला (Two-toed) और तीन अंगुली वाला (Three-toed). दोनों ही पेड़ों पर उल्टे लटककर रहते हैं. उनकी उंगलियां हुक की तरह होती हैं जो उन्हें घंटों लटके रहने में मदद करती है. वे इतने धीमे चलते हैं कि प्रति मिनट सिर्फ 4-5 मीटर की दूरी तय कर पाते हैं.

वैज्ञानिकों के अनुसार स्लॉथ का आलस्य एक सर्वाइवल स्ट्रैटजी है. कम हलचल करने से उसकी एनर्जी बचती है और शिकारी भी इसे नोटिस नहीं कर पाते. यह मुख्य रूप से पत्तियां खाता है जो पचाने में मुश्किल होती हैं. इसके पेट में विशेष बैक्टीरिया होते हैं जो पत्तियों को तोड़ते हैं. स्लॉथ पूरे हफ्ते पेड़ पर ही रहता है, नीचे सिर्फ पॉटी और कभी-कभी मूवमेंट के लिए आता है. मादा स्लॉथ साल में एक बार बच्चा देती है. बच्चा भी मां के साथ उल्टा लटककर रहता है. इनके बाल उल्टे दिशा में बढ़ते हैं ताकि बारिश का पानी बह सके. स्लॉथ इतने आलसी होते हैं कि कभी-कभी वे पेड़ पर मर भी जाते हैं और महीनों तक लटके रहते हैं

भारत में स्लॉथ सीधे नहीं पाए जाते लेकिन कई वन्यजीव उद्यानों और चिड़ियाघरों में उन्हें देखा जा सकता है. दक्षिण अमेरिका के रेनफॉरेस्ट इनके मुख्य घर हैं. जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई के कारण स्लॉथ आज विलुप्त होने के खतरे में हैं. कई संगठन इनकी रक्षा के लिए काम कर रहे हैं. स्लॉथ के अलावा कोआला, पांडा और कुछ सांप भी आलसी माने जाते हैं. लेकिन स्लॉथ का रिकॉर्ड सबसे अनोखा है. कोआला भी दिन में 18-20 घंटे सोता है लेकिन पॉटी का रिकॉर्ड स्लॉथ का ही है.