अंतिम संस्कार के बाद जिंदा लौटा युवक, लापरवाही या संयोग के सवालों में उलझी पुलिस और परिवारवाले
धमतरी: 28 साल का मोतीलाल विश्वकर्मा जुलाई के तीसरे हफ्ते में घर से लापता हो गया था. लापता मोतीलाल की तलाश में परिवार और मोहल्ले के लोग लगे हुए थे. इसी बीच 28 जुलाई को सेमार नाले के पास से एक शव पुलिस ने स्थानीय लोगों की सूचना पर बरामद किया. बरामद किया गया शव काफी बुरी हालत में था. पुलिस ने शव की पहचान के लिए लोगों से जानकारी जुटाई. लापता युवक के परिजनों ने बताया कि शव उनके गुम हुए मोतीलाल विश्वकर्मा की ही है. जिसके बाद पुलिस ने कागजी कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया. परिजनों ने भी आनन-फानन में शव का पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार कर दिया.
घटनाक्रम में बड़ा ट्विस्ट तब आया जब मोतीलाल विश्वकर्मा अचानक से अपने घर पर पहुंच गया. घरवाले और स्थानीय लोग मोतीलाल विश्वकर्मा को देखकर पहले तो डर गए,फिर चौंककर उसके गायब होने की बात उससे पूछने लगे. परिजनों ने भी बताया कि मोतीलाल की मौत के सदमे से वो अभी उबर भी नहीं पाए थे कि 14 अगस्त को उनको ये खुशखबरी मिली की मोतीलाल जिंदा है और घर लौट आया है.
मोतीलाल के घर लौटने से पहले एक और घटना घटी. दरअसल शहर के संबलपुर मोड़ पर जो पेट्रोल पंप है, मोतीलाल विश्वकर्मा वहां पर बीमार हालत में कुछ लोगों को बैठा मिला. मोतीलाल की हालत कुछ ठीक-ठाक नहीं थी, लिहाजा लोगों ने इसकी जानकारी जिले में समाज सेवा करने वाले वरदान परमार्थ सेवा समिति के सदस्य पप्पू साहू को दी. जिसके बाद उनकी मदद और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की सहायता से युवक की पतासाजी शुरू की गई.
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के शिवा प्रधान ने बताया कि युवक विक्षिप्त अवस्था में मिला था. उसकी स्थिति को देखते हुए उसे सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया. पहचान की कोशिश के दौरान उसके पास मिले दस्तावेजों से पता चला कि वह बलौदा बाजार जिले का रहने वाला है. इसके बाद पुलिस की मदद से उसके परिजनों से संपर्क किया गया. पुलिस के माध्यम से जब परिवार को सूचना मिली कि मोतीलाल जिंदा है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. जिस बेटे को वे मृत मान चुके थे, जिसका अंतिम संस्कार कर चुके थे और जिसकी मृत्यु के बाद की सभी रस्में भी निभा चुके थे, वही बेटा जिंदा था. इसके बाद शिवा प्रधान, पप्पू साहू और डोमन साहू मोतीलाल को लेकर उसके गांव पहुंचे. लंबे समय बाद अपने बेटे को जिंदा देखकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू आ गए.
लेकिन खुशी के इस पल के साथ ही एक बेहद गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया. अगर मोतीलाल जिंदा था, तो 28 जुलाई को सेमरा नाला के पास मिला शव आखिर किसका था ? क्या शव की पहचान में गलती हुई ? क्या क्षत-विक्षत शव के कारण परिवार से पहचान में चूक हुई ? या फिर इस पूरे मामले के पीछे कोई और कहानी छिपी है ? फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाले में मिले उस शव की पहचान करना है. एक तरफ परिवार को अपना बेटा वापस मिल गया है, तो दूसरी तरफ जिस व्यक्ति का शव समझकर अंतिम संस्कार किया गया, उसकी असली पहचान अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा रहस्य बन गई है.
