जशपुर के युवाओं ने 12 घंटे में खोला 5,340 मीटर ऊंची ‘जगतसुख पीक’ पर नया रूट, नाम दिया ‘विष्णु देव रूट’
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के आदिवासी युवाओं के एक साहसी दल ने एक अविस्मरणीय उपलब्धि हासिल की है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर (लगभग 17,520 फीट) ऊंची जगतसुख पीक पर एक नया और अत्यंत कठिन ‘आल्पाइन रूट’ खोलकर तिरंगा फहराया। इस ऐतिहासिक मार्ग को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। पर्वतारोहण की दुनिया में इसे एक असाधारण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई बेस कैंप से मात्र 12 घंटे में पूरी कर ली। यह चढ़ाई आल्पाइन शैली में की गई, जिसमें पर्वतारोही बिना फिक्स रोप, बिना सपोर्ट स्टाफ और बिना पहले से तय शिविरों के, पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ते हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीम के पांचों सदस्य पहली बार हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचे थे। इन सभी ने जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत के पहले प्राकृतिक एडवेंचर खेल प्रशिक्षण क्षेत्र “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया था। अभियान प्रमुख और मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जशपुर प्रशासन ने विश्वस्तरीय मानकों
स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह नया मार्ग तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन था। सीमित दृश्यता, खराब मौसम और ग्लेशियरों में छिपी खतरनाक दरारें लगातार बाधा डाल रही थीं, लेकिन युवाओं ने अपनी प्राकृतिक सहनशीलता और प्रशिक्षण के बल पर इसे पार किया। स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच और तकनीकी कोर टीम का हिस्सा रहे टोती वेल्स ने इस उपलब्धि की अंतरराष्ट्रीय सराहना करते हुए कहा कि इन युवाओं ने, जिन्होंने कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
