महिलाओं पर विवादित टिप्पणी के बाद अनिरुद्धाचार्य पर चलेगा केस, कोर्ट में सुनवाई का आदेश
वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक और संत अनिरुद्धाचार्य महिलाओं को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी के कारण कानूनी घेराबंदी में फंस गए हैं। अपने एक प्रवचन के दौरान संत ने ऐसी टिप्पणी कर दी कि स्थानीय ही नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक संगठनों में भी तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई। मामला कोर्ट तक पहुंचा और अब मथुरा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) न्यायालय ने परिवाद दर्ज करते हुए सुनवाई की तिथि 1 जनवरी 2026 तय कर दी है। इस पूरे विवाद की जड़ एक प्रवचन में दिया गया वह बयान है जिसमें संत अनिरुद्धाचार्य ने महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि “महिलाएं 25 वर्ष की उम्र में 4 जगह मुंह मार लेती हैं, इसलिए उनकी शादी 14 वर्ष की आयु में हो जानी चाहिए।” यह बयान सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ और आलोचनाओं का केंद्र बन गया। कई लोगों ने इसे न सिर्फ महिलाओं का अपमान बताया, बल्कि इसे सामाजिक मर्यादाओं और मान्यताओं पर भी सीधा आघात माना।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा आगरा की जिला अध्यक्ष मीरा ठाकुर ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक और समाज में महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला बताया। उन्होंने मथुरा सीजेएम कोर्ट में लिखित शिकायत दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि संत अनिरुद्धाचार्य अपने प्रवचनों में महिलाओं पर अनुचित और अवमाननापूर्ण टिप्पणियाँ करते हैं, जिससे समाज में गलत संदेश जाता है। मीरा ठाकुर ने यह भी कहा कि संत का समाज में एक बड़ा प्रभाव है। उनके प्रवचन लाखों लोग सुनते हैं, ऐसे में इस तरह की टिप्पणी न सिर्फ महिलाओं का अपमान है, बल्कि युवा पीढ़ी के मन में भी गलत विचार स्थापित कर सकती है। उनके अनुसार, संत की टिप्पणियाँ धार्मिक मंच का दुरुपयोग करने के समान हैं और इस पर कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है।
मीरा ठाकुर की शिकायत के बाद मथुरा सीजेएम कोर्ट ने परिवाद दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 1 जनवरी 2026 की तारीख निर्धारित की है। इसका अर्थ यह है कि अदालत ने आरोपों को गंभीरता से लिया है और मामले की कानूनी जांच आगे बढ़ेगी।
संत अनिरुद्धाचार्य अपने कथावाचन और प्रवचनों के लिए पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध हैं। वे धार्मिक यात्राओं, कथा प्रवचनों और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रोताओं को आकर्षित करते हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब उनके किसी बयान ने विवाद खड़ा किया हो। समय-समय पर वे समाजिक मुद्दों पर तीखी और भड़काऊ टिप्पणियाँ कर चुके हैं, जिन पर कई वर्गों ने आपत्ति जताई है। लेकिन इस बार महिलाओं को लेकर दिए गए कथन ने इतनी व्यापक आलोचना उत्पन्न की कि मामला न्यायालय तक पहुँच गया।
सिर्फ मीरा ठाकुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई महिला संगठनों ने भी संत के बयान की निंदा की है। उनका कहना है कि 21वीं सदी में भी जब महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वावलंबन और अधिकारों को मजबूत करने की बात की जा रही है, तब इस तरह की बयानबाजी महिलाओं को दोयम दर्जे का दिखाती है। कई कार्यकर्ताओं का मत है कि संत जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों को अपने शब्दों की मर्यादा और प्रभाव को समझना चाहिए। धार्मिक मंच का उद्देश्य समाज को दिशा देना होता है, न कि किसी वर्ग विशेष को नीचा दिखाना या उनके बारे में गलत धारणाएँ फैलाना।
