CG : अगले 2 दिन ठंड बढ़ेगी, 2° तक गिरेगा पारा, जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग पर घना कोहरा, दुर्ग में शीतलहर

उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं के कारण छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दुर्ग में शीतलहर का असर बना हुआ है, जहां रात का तापमान 9.2°C तक गिर गया। अंबिकापुर, पेंड्रा और रायगढ़ में भी ठिठुरन बढ़ गई है, और सुबह-शाम के वक्त लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। शुक्रवार सुबह बस्तर संभाग में ठंड और कोहरे का असर साफ दिखा। जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग पर घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता कम हो गई और वाहनों की रफ्तार प्रभावित हुई। सरगुजा, पेंड्रा और रायगढ़ जैसे इलाकों में सुबह और शाम के समय लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। मैनपाट और आसपास के क्षेत्रों में पाला पड़ने की घटनाएं भी सामने आई हैं। मौसम विभाग ने बताया कि फिलहाल मौसम शुष्क रहेगा और किसी बड़े सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना नहीं है, लेकिन उत्तर से आ रही हवाएं ठंड को और बढ़ा सकती हैं। बीते 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में दर्ज किया गया।

ठंड का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। रायपुर के अंबेडकर अस्पताल और निजी अस्पतालों में बीते एक महीने में बच्चों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आए हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात और छोटे बच्चे ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। पर्याप्त सावधानी न बरतने पर कई मामलों में बच्चों को एनआईसीयू और एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में भी सर्दी-खांसी, वायरल फीवर और सांस से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अंबेडकर अस्पताल में प्रतिदिन 2000 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग पर सबसे ज्यादा दबाव देखा जा रहा है। शीतलहर के मद्देनजर रायपुर नगर निगम ने राहत के तौर पर शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था शुरू की है। मेयर और निगम आयुक्त के निर्देश पर जोन स्तर पर निगरानी की जा रही है, ताकि बेघर और जरूरतमंद लोगों को ठंड से राहत मिल सके। स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर लोगों से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें, गर्म कपड़े पहनें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि दिन और रात के तापमान में बड़े अंतर के कारण मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, खासकर ग्रामीण और वन क्षेत्रों में।

 

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