‘नहीं तो अल्लाह हमें जहन्नुम…’ ‘मुल्लाओं देश छोड़ो’ के नारों के बीच ऐसा क्यों बोले ईरानी राष्ट्रपति

ईरान की कमजोर होती अर्थव्यवस्था से भड़के विरोध प्रदर्शन गुरुवार को देश के ग्रामीण प्रांतों तक पहुंच गए. अधिकारियों के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसा में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई. यह पहली बार है जब मौजूदा आंदोलन में मौतों की पुष्टि हुई है. ईरान में हो रहे ये प्रदर्शन 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े माने जा रहे हैं. उस साल 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ था. हालांकि, मौजूदा विरोध अब तक पूरे देश में एकसाथ नहीं फैला है और न ही यह महसा अमीनी के मामले जितना बड़ा है. अमीनी को हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. हालिया आंदोलन में सबसे गंभीर हिंसा ईरान के लोरेस्तान प्रांत के अजना शहर में देखने को मिली, जो तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सड़कों पर जलती हुई वस्तुएं, गोलियों की आवाजें और ‘शर्म करो, शर्म करो’, ‘मुल्लाओं देश छोड़ो’ के नारे सुनाई दे रहे हैं. ईरान के हालिया आंदोलन की वजह देश की मुद्रा ईरानी रियाल में भारी गिरावट

हालांकि, राष्ट्रपति ने यह भी स्वीकार किया है कि रियाल के तेजी से अवमूल्यन के चलते उनके पास हालात सुधारने के लिए बहुत सीमित विकल्प हैं. फिलहाल एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है. इस बीच पेजेश्कियान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो देश में चल रहे आंदोलन के लिए अपनी सरकार को जिम्मदार बता रहे हैं. वो कह रहे हैं कि अगर सरकारी अधिकारी लोगों की समस्याओं को नहीं सुलझाते तो अल्लाह उन्हें जहन्नुम में भेजेगा. पेजेश्कियान के हवाले से ‘द जेरूसलम पोस्ट’ ने लिखा, ‘कुरान के अनुसार, अगर हम लोगों की दिक्कतें दूर नहीं कर पाए तो हमारा अंजाम नरक होगा, अल्लाह हमें जहन्नुम में भेजेंगे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए हमें हर संभव तरीके से, चाहे एक व्यक्ति के रूप में, एक सामाजिक समूह के रूप में, पूंजीपति के रूप में या सरकार के तौर पर, लोगों की समस्याओं की गांठें खोलने की कोशिश करनी चाहिए.’ इसी दौरान पेजेश्कियान ने कहा कि देश की समस्याओं के लिए अमेरिका को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता बल्कि इसके लिए उनकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘इसके लिए अमेरिका की तरफ मत देखिए. इसको-उसको दोष मत दीजिए. हमें लोगों को संतुष्ट करने का काम करना चाहिए. हमारी जिम्मेदारी है कि हम संसाधनों को सुरक्षित और सही तरीके से मैनेज करें. हमें समाधान ढूंढने चाहिए और समस्याओं को आगे बढ़ाकर सुलझाना चाहिए.’ ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन ने बुधवार को देश के बड़े हिस्से में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया. आधिकारिक तौर पर इसकी वजह ठंडे मौसम को बताया गया, लेकिन इसे राजधानी से लोगों को बाहर भेजने और लंबे वीकेंड के जरिए भीड़ को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. ईरान में वीकेंड गुरुवार और शुक्रवार होता है, जबकि शनिवार को इमाम अली की जयंती है, जो कई लोगों के लिए छुट्टी का दिन है. सरकार लोगों को राजधानी से बाहर भेजकर आंदोलन की तीव्रता कम करने की कोशिश कर रही है.

खामेनेई की सरकार अब भी जून में हुए 12 दिन के युद्ध के असर से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया था. इस दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी. इस युद्ध में ईरान को भारी नुकसान हुआ. अमेरिका ने ईरान के परमाणु प्रोग्राम को निशाना बनाते हुए उसके तीन परमाणु ठिकानों-फोर्दो, नतांज और इस्फहान को भारी नुकसान पहुंचाया था. ईरान का कहना है कि वह देश के किसी भी स्थल पर यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. उसने पश्चिमी देशों से कई बार कहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर संभावित बातचीत के लिए तैयार है, ताकि प्रतिबंधों में राहत मिल सके.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *