चांद पर भी परमाणु रिएक्टर लगाने की होड़, US का ऐलान- 2030 तक पूरा कर लेंगे काम
अमेरिका ने एलान किया है कि वह चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर लगाने की योजना पर काम कर रहा है. इसके लिए यूएस की ओर से एक डेडलाइन भी रखी गई है. अमेरिका का दावा है कि साल 2030 तक इस मिशन को मूर्त रूप देने का काम पूरा होगा. अमेरिका आने वाले समय में अंतरिक्ष में परमाणु मिशन पर काम करने जा रहा है. बताया जा रहा है कि अमेरिका चांद पर स्थायी रूप से मानव और रोबोटिक मौजूदगी की दिशा में एक अहम कदम उठाने जा रहा है और वहां पर न्यूक्लियर रिएक्टर लगाने की योजना बना रहा है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, नासा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने मिशन मून के लिए एक परमाणु फिशन सरफेस सिस्टम विकसित करने के लिए एक नए कार्यक्रम पर संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं.
बताया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से साल 2030 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, इस समय तक चांद की सतह पर यह रिएक्टर तैनात किए जाएं. ये पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल 18 दिसंबर को एक कार्यकारी आदेश ‘अमेरिकी अंतरिक्ष श्रेष्ठता सुनिश्चित करना’ जारी किया था, जो पूरी तरीके से एजेंसियों को दशक के अंत तक प्रक्षेपण के लिए एक चंद्र सतह रिएक्टर तैयार रखने का निर्देश देता है. अमेरिका के इस न्यूक्लियर मिशन को लेकर NASA एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमान ने बताया कि यूएस चांद पर लौटने, वहां रहने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और मंगल पर उससे आगे के लिए अगली छलांग लगाने के लिए आवश्यक निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है. आगे यह भी बताया गया है कि चंद्रमा पर ये रिएक्टर एक विखंडन सतह विद्युत प्रणाली का इस्तेमाल करेंगे, यह भविष्य के लंबे चंद्र अभियानों के लिए सूरज के प्रकाश या तापमान की परवाह किए बिना सुरक्षित और प्रचुर मात्रा में विद्युत शक्ति उत्पन्न करने में सक्षम होगी.
गौरतलब है कि अमेरिका केवल इकलौता देश नहीं है, जो चांद पर परमाणु योजनाएं बनाने पर काम कर रहा है. पिछले साल मई के महीने में चीन और रूस ने भी चांद पर एक स्वचालित परमाणु ऊर्जा स्टेशन बनाने की योजना की घोषणा की थी. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रूस के सरकारी अंतरिक्ष निगम, रोस्कोस्मोस ने कहा किक उसने साल 2036 तक एक चंद्र ऊर्जा संयंत्र बनाने की योजना बनाई है. वहीं, इसके लिए लावोचकिन एसोसिएशन एयरोस्पेस कंपनी के साथ एक अनुबंध पर भी हस्ताक्षर किए हैं.
इस योजना को लेकर रोस्कोस्मोस की ओर से कहा गया कि यह परियोजना एक स्थायी रूप से कार्यरत वैज्ञानिक चंद्र स्टेशन के निर्माण और एक बार के मिशन से दीर्घकालिक चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम की ओर हो रहे विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
