CG : धान खरीदी 2 दिन के लिए बढ़ाई गई, सीएम का बड़ा फैसला….

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सरकार की बड़ी चूक आखिरकार सामने आ ही गई. हजारों-लाखों किसानों को धान बेचने से वंचित करने के बाद अब साय सरकार को मजबूरन दो दिन की अतिरिक्त धान खरीदी का फैसला लेना पड़ा है. यह फैसला सरकार की संवेदनशीलता नहीं, बल्कि कांग्रेस के दबाव और किसानों के आंदोलन का नतीजा बताया जा रहा है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जानकारी दी कि प्रदेश में विशेष रूप से 4 और 5 फरवरी दो दिनों के लिए फिर से धान खरीदी की जाएगी. उन्होंने कहा कि जिन किसानों का धान किसी कारणवश तय समय-सीमा में नहीं खरीदा जा सका था, उन्हें एक और मौका दिया जाएगा. मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस अवधि में केवल उन्हीं किसानों से धान खरीदा जाएगा, जो पहले किसी कारण से वंचित रह गए थे.

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि समीक्षा में सामने आया कि कई किसानों का टोकन कट चुका था, लेकिन वे धान नहीं बेच पाए. वहीं, कुछ किसानों का पंजीयन ही नहीं हो सका था. सरकार ने ऐसे सभी किसानों का चिन्हांकन कर लिया है, अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र किसान वंचित न रहे. धान खरीदी की तारीख बढ़ाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार सरकार पर हमलावर थे. रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास में पत्रकारों से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने कहा था कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर साफ चेतावनी दी थी कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब उसी पत्र और कांग्रेस के दबाव के बाद सरकार ने दो दिन की अतिरिक्त धान खरीदी का ऐलान किया है.

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, धान खरीदी 75 दिन तक होनी थी, लेकिन सरकार ने उसे सिर्फ 53 दिन में ही बंद कर दिया. नतीजा यह हुआ कि लाखों किसान धान बेचने से वंचित रह गए. हजारों किसानों को टोकन ही नहीं मिला और जिनको मिला, उन पर आधा धान बेचने का दबाव बनाया गया.
भूपेश बघेल ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब सरगुजा, बस्तर, कांकेर समेत कई जिलों में किसान धान बेचने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री नौका विहार का आनंद ले रहे थे। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनका भी धान नहीं खरीदा गया.

पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब किसानों का धान ही नहीं खरीदा गया, तो अब सरकार उनसे ऋण वसूली कैसे करेगी? उन्होंने कहा कि किसानों के साथ धोखा हुआ है और यह साबित करता है कि केंद्र और राज्य की ‘मोदी की गारंटी’ पूरी तरह फेल हो चुकी है.

अब सरकार भले ही दो दिन की अतिरिक्त धान खरीदी को अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश करे, लेकिन हकीकत यही है कि यह फैसला कांग्रेस की लड़ाई और किसानों की आवाज का परिणाम है. कांग्रेस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह किसानों के हक के लिए सड़क से सदन तक लड़ने वाली पार्टी है.

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