देश में खाली हैं 2500 से ज्यादा IAS-IPS के पद…फिर चर्चा में UPSC!

देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली सिविल सर्विस को लेकर सरकार ने हैरान कर देने वाले आंकड़े सामने रखे हैं. सरकार ने संसद में बताया कि भारत की तीन प्रमुख सेवाओं में अधिकारियों की कमी है और कुल 2,800 से ज्यादा पद अभी खाली हैं. इसमें सबसे ज्यादा पद आईएएस में हैं, जहां 1,300 पद खाली हैं, इसके बाद आईपीएस में 505 और आईएफओएस में 1,029 पद खाली हैं. यह आंकड़ा 1 जनवरी, 2025 के अनुसार है. सभी कैडरों में आईएएस अधिकारियों की कुल स्वीकृत संख्या 6,877 है, जिनमें से 5,577 अधिकारी अभी काम कर रहे हैं. आईपीएस में 5,099 स्वीकृत पदों के मुकाबले 4,594 अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि आईएफओएस में 3,193 स्वीकृत पदों में से 2,164 अधिकारी काम कर रहे हैं.

सरकार के अनुसार, तीनों सिविल सेवाओं में खाली पदों पर आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस के कुल 15,169 स्वीकृत पद हैं. इनमें से सिर्फ 12,335 पदों पर अधिकारी अपनी सेवा दे रहे हैं. वहीं, 2,834 पद खाली पड़े हैं. 1 जनवरी, 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, IAS में 1300 पद, IPS में 505 और IFS में कुल 1029 पद खाली यानी कि विदेश सेवा और प्रशासनिक सेवा दोनों में बड़ी कमी दर्ज की गई है.

कैडर-वार आंकड़ों से मालूम चलता है कि आईएएस में खाली पद सबसे अधिक हैं. उत्तर प्रदेश में 652 स्वीकृत पदों में से 571 अधिकारी ही तैनात हैं. मध्य प्रदेश में 459 पदों में से 391 और महाराष्ट्र में 435 पदों में से 359 अधिकारी ही कार्यरत हैं. आईपीएस में भी बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्वीकृत और तैनात अधिकारियों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. आंकड़ों के अनुसार, आईएफओएस सबसे ज्यादा प्रभावित है.

पिछले पांच सालों में (2020–2024) अखिल भारतीय सेवाओं में आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवारों की सीधी भर्ती की बात करें तो, आईएएस में 245 ओबीसी, 135 एससी और 67 एसटी उम्मीदवार नियुक्त हुए. आईपीएस में 255 ओबीसी, 141 एससी और 71 एसटी भर्ती हुए. वहीं, आईएफओएस में 231 ओबीसी, 95 एससी और 48 एसटी उम्मीदवारों को नियुक्त किया गए. यह आंकड़ा सीपीआई-एम सदस्य जॉन ब्रिटास द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में साझा किया गया था.

 

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