जमीन धंस रही और समुद्र बढ़ रहा… चेन्नई के 65 लाख लोगों पर मंडरा रहा खतरा?
दुनिया के अधिकांश हिस्सों में जलवायु प्ररिवर्तन का प्रभाव देखने को मिल रहा है. इस बीच वैज्ञानिकों का मानना है कि चेन्नई की जमीन हर साल 1.5 सेंटीमीटर तक धंस रही है और समुद्र का स्तर हर साल 2.8 मिलीमीटर बढ़ रहा है. यह एक बड़े खतरे का संकेत है. जानकार मानते हैं कि अगर ऐसा ही होता रहा, तो आने वाले 25 सालों में करीब 10 लाख से अधिक लोग बाढ़ के उच्च जोखिम वाले इलाकों में आ सकते हैं. इसके साथ ही वैज्ञानिक मानते हैं कि इससे शहर के निचले तटीय इलाकों का लगभग एक तिहाई हिस्सा तूफानी लहरों से खतरे में पड़ सकता है. अनुमान लगाया गया है कि चेन्नई में भीषण बाढ़ के खतरे में रहने वाली आबादी 2030 में 52 लाख से बढ़कर 2050 तक 65 लाख हो जाएगी. इस अध्ययन का नेतृत्व मोहाली (पंजाब) स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के पोस्टडॉक्टोरल भू-वैज्ञानिक अर्पण शास्त्री ने किया है. उन्होंने बताया कि शहर के कई बड़े आवासीय और व्यावसायिक इलाके विनाशकारी बाढ़ के खतरे में हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि चेन्नई के तट पर औसतन हर साल पांच तूफान आते हैं. यही कारण है कि चेन्नई शहर दुनिया के सबसे तूफान-प्रवण इलाकों में से एक है.
वैज्ञानिकों का मत है कि आने वाले समय में आपदा से बचने के लिए हमें प्रकृतिक व्यवस्था से कम छेड़छाड़ करना होगा. माना जाता है कि चेन्नई में बार-बार चक्रवात और बाढ़ आती है, इसकी मुख्य वजह आंधाधुंध निर्माण कार्य है. बहुमंजिला इमारतों का निर्माण या अनियोजित विकास से पानी का बहाव काफी रुक रहा है. जिस कारण प्राकृतिक संरचना का नुकसान पहुंच रहा है. इस बात पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है और इसको लेकर सख्त कदम उठाया जाना चाहिए.
