कांतारा विवाद, रणवीर सिंह चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे, मिमिक्री केस में हाई कोर्ट के आदेश के बाद किए दर्शन

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने मंगलवार सुबह मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। यह कदम उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया है, जो उनके खिलाफ दर्ज ‘कांतारा’ फिल्म के दैवा सीन की मिमिक्री केस में दिया गया था। कोर्ट ने अप्रैल में उन्हें चार हफ्ते के भीतर मंदिर जाकर दर्शन करने का आदेश दिया था। रणवीर सिंह का यह मंदिर दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब एक दिन पहले ही फिल्म फेडरेशन (FWICE) ने फिल्म ‘डॉन 3’ को छोड़ने के कारण उनके खिलाफ असहयोग निर्देश जारी कर उन्हें बैन कर दिया था।

रणवीर सिंह मंगलवार सुबह मैसूर पहुंचे। इससे पहले सुबह जल्दी उन्हें मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिनेता ने किसी वीआईपी सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया। वे एक आम श्रद्धालु की तरह कतार में खड़े हुए और देवी चामुंडेश्वरी के दर्शन किए। गर्भगृह के प्रवेश द्वार तक उन्होंने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था, जिसे अंदर जाने से पहले हटा दिया। वे बिना किसी पूजा सामग्री के खाली हाथ पहुंचे थे और मंदिर में विशेष प्रार्थना की।

यह पूरा विवाद पिछले साल 30 नवंबर 2025 को गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) के समापन समारोह से शुरू हुआ था। इस समारोह में रणवीर सिंह ने फिल्म ‘कांतारा’ के प्रसिद्ध ‘दैवा’ सीन की मिमिक्री की थी, जिसमें फिल्म के डायरेक्टर और लीड एक्टर ऋषभ शेट्टी नजर आए थे। इस परफॉर्मेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कन्नड़ समुदाय के एक बड़े हिस्से ने कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके बाद कन्नड़ समुदाय की भावनाएं आहत करने के आरोप में रणवीर के खिलाफ कर्नाटक में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद रणवीर सिंह ने फरवरी 2026 में राहत के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया था। तब कोर्ट ने उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अप्रैल में रणवीर ने कोर्ट में एक संशोधित हलफनामा दायर कर बिना किसी शर्त के माफी मांगी थी। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सफाई देते हुए लिखा था कि उनका इरादा सिर्फ ऋषभ शेट्टी की बेहतरीन एक्टिंग की सराहना करना था और वे सभी संस्कृतियों का सम्मान करते हैं। इस पर कोर्ट ने मामले को बंद करने के संकेत देते हुए उन्हें मंदिर जाने का आदेश दिया था।