समय से पहले उत्तर प्रदेश में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव, जानें कारण

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नई चर्चा ने अचानक रफ्तार पकड़ ली है। बात ही कुछ ऐसी है। चर्चा यह चल रही है कि क्या साल 2027 में होने वाला यूपी विधानसभा चुनाव अपने तय समय से कुछ हफ्ते पहले कराया जा सकता है? हालांकि, चुनाव आयोग या सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई मुहर नहीं लगी है। लेकिन, पर्दे के पीछे इसकी जमीन तैयार होना शुरू हो गई है। लखनऊ के प्रशासनिक हलकों से आ रही खबरों के मुताबिक, इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह देश में होने वाली महा-जनगणना है। दरअसल, साल 2027 की जनगणना का दूसरा और सबसे अहम चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच होना तय हुआ है। इसी दौरान घर-घर जाकर लोगों की असली गिनती की जाएगी। अब पेंच यहीं फंस रहा है। यूपी में पिछले तीन विधानसभा चुनाव (2012, 2017 और 2022) भी इसी फरवरी-मार्च के महीने में ही हुए थे।

अधिकारियों का कहना है कि चुनाव कराने और जनगणना करने के लिए एक ही सरकारी मशीनरी यानी शिक्षकों, जिला प्रशासन और पुलिस बल का इस्तेमाल होता है। लखनऊ कलेक्ट्रेट के सूत्रों के मुताबिक, एक ही समय में दोनों बड़े काम करवाना प्रशासन के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। इसी वजह से चुनाव को कुछ हफ्ते पहले यानी दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में खिसकाने की संभावना पर माथापच्ची चल रही है। संवैधानिक जानकारों की मानें तो समय से थोड़ा पहले चुनाव कराना कोई गैर-कानूनी काम नहीं है। नियम कहते हैं कि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के 6 महीने पहले तक कभी भी चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। मौजूदा यूपी विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। इस लिहाज से देखें तो चुनाव आयोग चाहे तो नवंबर 2026 के बाद कभी भी वोटिंग करा सकता है।

इस सुगबुगाहट के बीच राज्य की राजनीतिक पार्टियों ने भी अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। बीजेपी के बड़े नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी तो साल के बारह महीने चुनावी मोड में ही रहती है, इसलिए चुनाव चाहे जब हों, वे तैयार हैं।

वहीं दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी और विपक्ष इस चर्चा को अलग नजरिए से देख रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी है, इसलिए ध्यान भटकाने और अपने फायदे के लिए ऐसी बातें हवा में तैर रही हैं।