प्रकृति का ‘सुपरहीरो’: न दर्द होता है, न बुढ़ापा आता है; बिना ऑक्सीजन भी रहता है जिंदा!
जब बात अजीबोगरीब जीवों की आती है, तो प्रकृति हमें हमेशा हैरान कर देती है. ऐसा ही एक जीव है ‘नेकेड मोल रैट’. पहली नजर में देखने पर यह किसी झुर्रीदार, बिना बालों वाले छोटे से चूहे जैसा दिखता है, लेकिन इसके कारनामे किसी सुपरहीरो से कम नहीं हैं. आइए जानते हैं जमीन के नीचे रहने वाले इस बेहद अनोखे और रहस्यमय जीव से जुड़े कुछ चौंकाने वाले रोचक तथ्य , जिन्हें पढ़कर आप भी दंग रह जाएंगे.
जरा सोचिए, अगर किस को तेजाब या तीखी मिर्च छू जाए तो क्या होगा? लेकिन नेकेड मोल रैट को इन सब चीजों के फर्क नहीं पड़ता. दरअसल, इनके शरीर में खास केमिकल यानी न्यूरोट्रांसमीटर ही नहीं होता, जो दिमाग तक दर्द का सिग्नल पहुंचाता है. इसलिए इन्हें जलने या कटने पर दर्द का कोई अहसास नहीं होता.
आम चूहे या इंसान बिना ऑक्सीजन के कुछ ही मिनटों में दम तोड़ देते हैं, लेकिन नेकेड मोल रैट बिना ऑक्सीजन के भी करीब 18 मिनट तक बड़े आराम से रह सकता है. जब ऑक्सीजन खत्म होती है, तो यह जीव इंसानों की तरह ग्लूकोज का इस्तेमाल करना बंद कर देता है और फ्रुक्टोज से एनर्जी बनाना शुरू कर देता है. यह खूबी आमतौर पर केवल पौधों में पाई जाती है, लेकिन यह स्तनधारी जीव भी ऐसा करने में सक्षम है.
यह अनोखा जीव वैज्ञानिकों के लिए शोध का एक बड़ा विषय बना हुआ है, क्योंकि इस जीव को कैंसर कभी छू नहीं सकता. इसके शरीर में एक खास तरह की भारी शुगर पाई जाती है, जिसे High-Molecular-Mass Hyaluronan (HMM-HA) कहते हैं. यह शुगर कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं को शरीर में फैलने नहीं देती.
जहां आम चूहों की लाइफ 2 से 3 साल ही होती है, वहीं ‘नेकेड मोल रैट’ 30 से 32 साल तक जिंदा रहता है. यही नहीं, ढलती उम्र के साथ यह बूढ़ा या कमजोर नहीं होता. आपको जानकर हैरानी होगी कि यह जीव अपनी मौत के दिन तक वैसा ही फुर्तीला रहता है, जैसा जवानी में था. यह इकलौता ऐसा स्तनधारी जीव है, जो चींटियों या मधुमक्खियों की तरह मिलकर रहता है. इनकी पूरी बस्ती में सिर्फ एक ‘रानी’ होती है, जिसका काम बच्चे पैदा करना होता है. बाकी नेकेड मोल रैट मजदूर की तरह काम करते हैं, जैसे सुरंग खोदना, खाना लाना और रानी की रक्षा करना.
इनके दांत जबड़े के बाहर निकले होते हैं, ताकि सुरंग खोदते समय मिट्टी मुंह में न जाए. सबसे मजेदार बात यह है कि ये अपने दांतों को चॉपस्टिक की तरह अलग-अलग हिला भी सकते हैं. ये जीव लगभग अंधे होते हैं. ये सूंघकर और कंपन महसूस करके रास्ता ढूंढते हैं. इनकी एक और खासियत है कि ये सुरंगों में जितनी तेजी से आगे भाग सकते हैं, उतनी ही तेजी से उल्टे पांव भी दौड़ सकते हैं
