समंदर का सबसे शातिर शिकारी! आईने को हथियार बनाकर ऑक्टोपस ने कैसे किया कमाल, नई कला से वैज्ञानिक भी हैरान
समंदर की गहराइयों में रहने वाले ऑक्टोपस हमेशा से अपनी अनोखी बुद्धिमानी, इंसानों को चकमा देने की कला और जेलब्रेक जैसी अजीबो-गरीब हरकतों के लिए जाने जाते हैं. लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों के हाथ एक ऐसी सफलता लगी है, जिसने जीव विज्ञान की दुनिया में तहलका मचा दिया है. डार्टमाउथ कॉलेज के शोधकर्ताओं ने एक नई रिसर्च में यह साबित कर दिया है कि ऑक्टोपस एक साधारण शीशे यानी आईने का इस्तेमाल करके अपना छिपा हुआ भोजन ढूंढ सकते हैं. यह एक ऐसी मानसिक क्षमता है जो अब तक केवल इंसानों, स्तनधारियों और कुछ खास पक्षियों में ही देखी गई थी. इस चौंकाने वाले खुलासे ने वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या बिना रीढ़ वाले जीवों का दिमाग भी इंसानों की तरह काम कर सकता है.
डार्टमाउथ के ऑक्टोपस लैब में शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया के तीन खास प्रजाति वाले ऑक्टोपस (ऑक्टोपस बिमैकुलोइड्स) पर यह प्रयोग किया. वैज्ञानिक यह देखना चाहते थे कि क्या ऑक्टोपस आईने को एक औजार की तरह इस्तेमाल करके अपने आसपास के माहौल को समझ सकते हैं. इसके लिए उन्होंने खाना ऐसी जगह छिपा दिया जहां ऑक्टोपस उसे सीधे नहीं देख सकते थे. खाना केवल आईने के प्रतिबिंब में ही दिखाई दे रहा था. हैरान करने वाली बात यह रही कि ऑक्टोपस आईने की परछाईं की तरफ नहीं झपटे, बल्कि उन्होंने समझ लिया कि असली खाना किस दिशा में छिपा है और वो सीधे उधर ही गए.
इस प्रयोग की मुख्य लेखिका मैरी किसेलर के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी बिना रीढ़ वाले जीव (इनवर्टिब्रेड) ने आईने की मदद से अपने शिकार को खोजा है. वैज्ञानिकों ने ऑक्टोपस को सीधे टेस्ट में नहीं डाला. पहले उन्हें उनके टैंक में रखे शीशे से दोस्ती करने का समय दिया गया. इसके बाद एक कांच के जार में बंद जिंदा केकड़े को आईने के सामने रखा गया. ऑक्टोपस को इनाम पाने के लिए आईने से नजर हटाकर एक बाधा को पार करना था. सीनियर लेखक पीटर त्से ने समझाया कि जैसे इंसान गाड़ी चलाते समय धीरे-धीरे रियर-व्यू मिरर देखना सीखता है, ठीक वैसे ही ऑक्टोपस ने भी अनुभव से यह कला सीख ली.
वैज्ञानिकों ने इस टेस्ट को और पुख्ता बनाने के लिए असली केकड़े की जगह स्क्रीन पर एक वर्चुअल केकड़ा दिखाया, ताकि ऑक्टोपस सूंघकर या स्वाद से खाने का पता न लगा सके. ऑक्टोपस को एक स्टार्ट बॉक्स में रखा गया जिसके ठीक सामने शीशा था. वर्चुअल केकड़ा ऑक्टोपस के पीछे बाईं या दाईं ओर दिखाई देता था, जिसे सिर्फ आईने में देखा जा सकता था. नतीजों ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया क्योंकि ऑक्टोपस ने लगभग 73 प्रतिशत बार बिल्कुल सही दिशा का चुनाव किया और अपना इनाम जीता.
इस रिसर्च से एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ऑक्टोपस के दिमाग में उनके आसपास के माहौल का कोई ‘मेंटल मैप’ यानी मानसिक नक्शा होता है. मेंटल मैप की मदद से कोई भी जीव बिना देखे भी यह जान सकता है कि वह इस समय कहां खड़ा है और चीजें कहां रखी हैं. आमतौर पर यह काबिलियत केवल बहुत बुद्धिमान पक्षियों और स्तनधारियों में पाई जाती है. अगर भविष्य की रिसर्च में यह बात पूरी तरह सच साबित होती है, तो ऑक्टोपस को धरती का सबसे बुद्धिमान जीव मानने से कोई नहीं रोक पाएगा.
विकासवादी विज्ञान के नजरिए से यह खोज बेहद रोमांचक है. इंसानों और ऑक्टोपस के पूर्वज करीब 35 करोड़ से 50 करोड़ साल पहले अलग हो गए थे. इतने बड़े अंतर के बाद भी दोनों जीवों ने मुश्किल हालातों को हल करने के लिए एक जैसी दिमागी कला विकसित की. वैज्ञानिक इसे ‘कन्वर्जेंट इवोल्यूशन’ कहते हैं, जहां दो बिल्कुल अलग प्रजातियां समय के साथ एक जैसी बुद्धिमानी सीख जाती हैं. समंदर की गहराइयों में चट्टानों और कोरल के बीच छिपकर शिकार करने की आदत ने ही शायद ऑक्टोपस को इतना शातिर और बुद्धिमान बनाया है.
