चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया में भव्य स्वागत, किम जोंग उन के साथ शिखर वार्ता शुरू

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सोमवार को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और उनकी पत्नी ने शी जिनपिंग का भव्य स्वागत किया. इसके बाद प्योंगयांग के मुख्य चौक पर शी को सैन्य गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है. चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ बताया कि ये शी की सितंबर 2025 के बाद कोरियाई सुप्रीम लीडर से पहली मुलाकात है, जब दोनों बीजिंग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मिले थे.

चीनी राष्ट्रपति की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक और कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. पिछले सात साल में उत्तर कोरिया की धरती पर किसी चीनी शीर्ष नेता का ये पहला कदम है. इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात पिछले साल सितंबर महीने में बीजिंग में हुई थी, जहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य विदेशी नेताओं के साथ एक भव्य सैन्य परेड देखी थी. दक्षिण कोरिया की सियोल स्थित इवा वोमन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लीफ-एरिक ईस्ली के अनुसार, कोई भी चीनी नेता बिना किसी बड़े एजेंडे के उत्तर कोरिया का दौरा नहीं करता है. शी जिनपिंग की ये यात्रा पिछले महीने बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई उनकी बैक-टू-बैक शिखर वार्ताओं के ठीक बाद हो रही है. शी सितंबर में अमेरिकी यात्रा के दौरान फिर से ट्रंप से मिलने वाले हैं.

वन कोरिया सेंटर के प्रमुख क्वाक गिल सुप का मानना है कि शी जिनपिंग इस यात्रा के जरिए उत्तर कोरियाई प्रायद्वीप पर चीन के वास्तविक दबदबे और पूरे पूर्वोत्तर एशिया में अपनी मजबूत लीडरशिप को साबित करना चाहते हैं. उत्तर कोरिया पर फिर से अपना विशेष प्रभाव स्थापित करने से शी जिनपिंग को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली आगामी वार्ताओं में एक बड़ा कूटनीतिक लाभ (लीवरेज) मिल जाएगा. हाल के वर्षों में चीन और उत्तर कोरिया के संबंधों को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे. उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस को बड़े पैमाने पर अपने सैनिक और हथियार देकर मास्को के साथ सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी, जिसके बदले में उसे रूस से भारी आर्थिक और सैन्य सहायता मिली थी. ऐसे में चीन अब इस रक्षा संधि के 65वें वर्ष में अपने इस पड़ोसी देश को अकेले रूस के भरोसे नहीं छोड़ना चाहता.

किम जोंग उन को इस वक्त वैश्विक स्तर पर एक परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में मान्यता प्राप्त करने की सख्त दरकार है, ताकि वो संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंधों को हटवाने के लिए अमेरिका पर दबाव बना सकें. विशेषज्ञों का कहना है कि शी जिनपिंग इस मंच पर किम जोंग उन पर पूरी तरह से परमाणु निरस्त्रीकरण (Denuclearization) के लिए सार्वजनिक दबाव बनाने से बचेंगे और केवल शांति व स्थिरता की बात करेंगे.

कूटनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस शिखर वार्ता के दौरान चीन उत्तर कोरिया को डूबती अर्थव्यवस्था से उबारने के लिए कई बड़े आर्थिक सहायता पैकेज दे सकता है. इसमें बड़े पैमाने पर चावल और उर्वरकों (खाद) की खेप भेजना, उत्तर कोरिया के लिए चीनी समूह पर्यटन (ग्रुप टूरिज्म) को दोबारा शुरू करना और कई महत्वपूर्ण संयुक्त आर्थिक परियोजनाओं को ग्राउंड पर उतारना शामिल है. हाल ही में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद व्हाइट हाउस ने दावा किया था कि दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के साझा लक्ष्य की पुष्टि की है, लेकिन चीन ने केवल परमाणु मुद्दे पर चर्चा होने की बात कही थी. रविवार को किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने अमेरिकी बयान को पूरी तरह से झूठी और भ्रामक जानकारी कहकर खारिज कर दिया था.