तेजस Mk-1A फाइटर जेट के पार्ट्स में बड़ा फर्जीवाड़ा, एचएएल ने हैदराबाद की कंपनी पर एफआईआर दर्ज कराई
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने तेजस एमके-1ए फाइटर जेट प्रोग्राम में फर्जीवाड़ा करने वाली एक कंपनी पर क्रिमिनल केस दर्ज कराया है. यह कंपनी हैदराबाद की है जिसका नाम टेक एयरो डिवाइसेस है. इस कंपनी पर 199 फर्जी टेस्ट रिपोर्ट जमा करने का गंभीर आरोप लगा है. यह रिपोर्ट्स 2022 और 2023 के बीच आठ महीनों के दौरान दी गई थीं. 2 जून को बेंगलुरु के एचएएल पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर दर्ज की गई. यह शिकायत एचएएल के एयरक्राफ्ट डिवीजन के डिप्टी जनरल मैनेजर रानू गुप्ता ने की है. पुलिस ने टेक एयरो डिवाइसेस के सीईओ एम शिवराम प्रसाद को इस मामले में नामजद किया है. तेजस जैसे अहम प्रोजेक्ट में ऐसा फर्जीवाड़ा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता था.
एचएएल के एयरक्राफ्ट डिवीजन ने टेक एयरो डिवाइसेस को 18 परचेज आर्डर दिए थे. यह आर्डर मार्च 2022 से नवंबर 2023 के बीच दिए गए थे. इसमें तेजस एमके-1ए प्रोग्राम के लिए 172 आइटम्स की सप्लाई होनी थी. कंपनी को हर कंसाइनमेंट के साथ ओरिजिनल टेस्ट रिपोर्ट देनी थी. यह रिपोर्ट हार्डनेस और ब्रेक लोड जैसी चीजों की क्वालिटी साबित करने के लिए जरूरी थी. लेकिन कंपनी ने 199 फर्जी रिपोर्ट जमा कर दीं. यह सभी रिपोर्ट हैदराबाद की एक एजेंसी एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस के नाम पर बनाई गई थीं.
एचएएल के क्वालिटी कंट्रोल डिपार्टमेंट को इस मामले में शक हो गया था. इसके बाद 29 नवंबर 2023 को एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस के दफ्तर में एक ऑडिट किया गया. इस ऑडिट में बहुत ही चौंकाने वाली बात सामने आई. एक्सिस ने साफ किया कि उन्होंने ऐसी कोई भी रिपोर्ट जारी नहीं की है. फरवरी और सितंबर 2023 के बीच जमा की गई सभी रिपोर्ट पूरी तरह से फर्जी पाई गईं. एक्सिस ने लिखित में बताया कि टेक एयरो डिवाइसेस ने उनके नाम और सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल किया है.
इस खुलासे के बाद एचएएल ने टेक एयरो डिवाइसेस को एक कारण बताओ नोटिस भेजा. कंपनी ने 20 दिसंबर 2023 को अपनी गलती मानते हुए माफी की अपील की. लेकिन एचएएल ने इस अपील को तुरंत खारिज कर दिया. 6 जनवरी 2024 को एचएएल ने इस कंपनी को अपने अप्रूव्ड सप्लायर्स की लिस्ट से बाहर कर दिया. यह बैन तीन साल के लिए लगाया गया है जो 10 मार्च 2027 तक लागू रहेगा. कंपनी के सभी पेंडिंग पेमेंट भी रोक दिए गए हैं. पुलिस अब चीटिंग और जालसाजी के तहत मामले की गहराई से जांच कर रही है.
