समुद्र के भीतर मिला दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान

दुनिया भर में कई ऐसे रहस्य हैं, जिनसे पर्दा उठना अभी भी बाकी है. दुनिया में अलग-अलग जगहों से किसी न किसी बड़ी खोज की जानकारी हमेशा आती रहती है. इस बीच वैज्ञानिकों ने एक बड़ी खोज की है. चीनी वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर की तलहटी पर दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान पाया गया है. यह सबसे बड़ा होने के साथ-साथ सबसे गहरा कब्रिस्तान भी है. दरअसल, यह कब्रिस्तान मानवों का नहीं, बल्कि व्हेल मछलियों का है. चीनी वैज्ञानिकों ने खोज में पाया कि लाखों साल पुराने व्हेल के कंकालों का यह बड़ा इलाका गहरे समुद्र में जीवन और नई प्रजातियों के लिए एक बड़ा ठिकाना बना हुआ है. नेचर में छपी रिसर्च बताती है कि यह धरती पर अभी तक का सबसे गहरा और सबसे बड़ा कब्रिस्तान है, इसमें मौजूद जीवाश्म कम से कम 53 साल पुराने हैं.

रिपोर्ट बताती है कि चीनी वैज्ञानिकों ने इस खोज को अंजाम देने के लिए फेंडोजे नाम की एक छोटी सी पनडुब्बी का इस्तेमाल किया था. बता दें कि चीन की इस खास पनडुब्बी ने साल 2023 में समुद्र में कुल 32 बार गहरी डुबकी लगाई. जिसकी मदद से मिली जानकारी के बारे में विस्तार से अब बताया गया. रिपोर्ट बताती है कि ऑस्ट्रेलिया के पश्चिम में हिंद महासागर के भीतर करीब 12,00 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में ये कंकाल फैले हुए हैं. इस पूरे इलाके को डायमेंटीना जोन के नाम से जाना जाता है.

गौरतलब है कि वैज्ञानिक उस वक्त हैरान रह गए, जब उन्होंने रोबोटिक आर्म्स की मदद से समुद्र की सतह से करीब 7 KM की गहराई से 500 के करीब कंकालों के नमूमों के एकत्र किया. वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाते हुए बताया कि इतनी बड़ी तादाद में मिले सैंपल के बाद माना जा सकता है कि इस क्षेत्र में कम से कम 1 करोड़ से अधिक व्हेल के कंकाल मौजूद हैं.

वैज्ञानिक बताते हैं कि एक ही जगह पर इतना बड़ा कब्रिस्तान बनने की वजह व्हेलफॉल है. जब किसी व्हेल मछली की मौत हो जाती है, तो उसका भारी-भरकम शरीर समुद्र की गहरी तलहटी में गिर जाता है. इसी को व्हेल फॉल कहते हैं. इसके बाद अंधेर, ठंडे और सुनसान समुद्र के फर्श पर ये मृत शरीर गहरे समुद्र के जीवों के लिए भोजन और एनर्जी का बड़ा सोर्स बनता है.

वैज्ञानिकों ने माना कि यह खोज इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वास्तव में यह क्षेत्र जीवन से भरपूर है. वैज्ञानिकों ने यहं पर हड्डियां खाने वाले कीड़े, समुद्री घोंघे समेत कई अन्य जीवों को देखा है. हैरान करने वाली बात है कि इनमें से कई प्रजातियां विज्ञान के लिए पूरी तरीके से नई हैं. जानकारों ने माना कि इतनी गहराई में मौजूद यह जीव बताते हैं कि धरती पर कई ऐसी जगहें हैं, जिनके बारे में अभी काफी कम जानकारी है.